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गोल नहीं पाए तो गोल होने भी नहीं देंगे, ये लक्ष्य लेकर उतरे थे मैदान

गोवा नेशनल गेम्स...मप्र टीम की जीत की कहानी खिलाडिय़ों की जुबानी

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Goa National Games

mp hockry team

गोवा नेशनल गेम्स में मध्यप्रदेश महिला हॉकी टीम ने 75 साल बाद स्वर्ण पदक जीता। यह स्वर्ण पदक जीतने के पीछे खिलाडिय़ों की बेहतर प्लानिंग थीं। टीम की कप्तान प्रतिभा आर्य बताती है कि सिर्फ एक लक्ष्य लेकर हर मैच में मैदान उतरे थे ‘‘गोल नहीं कर पाए तो गोल होने भी नहीं देंगे’’। क्योंकि हमें मालूम था कि सामने हरियाणा, उड़ीसा और झारखंड जैसी मजबूत टीम होंगी, उनको गोल करने से रोक लिया तो हमारी जीत तय होगी और इस प्लानिंग में हम कामयाब रहे और चैंपियन बनकर लौटे।

हार-जीत नहीं सिर्फ बेहतर खेलना था लक्ष्य: प्रतिभा
मप्र हॉकी टीम कभी स्वर्ण पदक नहीं जीत पाई थी, इसलिए जीत का दबाब तो था, लेकिन सभी खिलाड़ी इस सोच के साथ मैदान में उतरे थे कि हार-जीत नहीं सभी को बेहतर प्रदर्शन करना है। इसके लिए करीब दो महीने से मैदान पर तैयारी जारी थी। नेशनल गेम्स में हरियाणा, उड़ीसा और झारखंड जैस्ी टीमों में ओलंपियन खिलाड़ी खेल रही थी, उन पर फोकस रहा और उनकी मार्किंग कर उनको हावी नहीं होने दिया। जिस प्लानिंग से मप्र टीम खेली उसमें हम कामयाब रहे।

हार का बदला लेना था, इसलिए पूरी ताकत लगा दी: याशिका
जीत की शिल्पकार रही मप्र टीम की गोलकीपर याशिका भदौरिया ने बताया, पूल मुकाबले में हरियाणा के हाथों हार गए थे, फाइनल में हरियाणा से फिर सामने थी। मैच में हमारी खिलाडिय़ों ने पूरी ताकत ला दी और एक भी गोल नहीं होने दिया। मैच का निर्णय पेनल्टी शूट आउट पर था और सभी की निगाहें मेरे ऊपर थी, मैंने अपने ऊपर दबाब हावी होने नहीं दिया और सिर्फ हरियाणा से हार का बदला लेना था, इसलिए पूरी ताकत लगा दी और आखिर हम चैंपियन बनकर ही लौटे। यह पल मेरी जिंदगी सबसे महत्वपूर्ण पल था।

तीन बार स्वर्ण पदक से चूकी मप्र टीम
मप्र महिला हॉकी एकेडमी टीम के कोच परमजीत सिंह बताते हैं कि टीम तीन बार स्वर्ण पदक जीतने से चूक गई थी, लेकिन इस बार टीम ने तैयारी बेहतर तरीके से की थी। इस बार टीम में पूरी खिलाड़ी मप्र हॉकी एकेडमी की खेली, जिसमें 6 खिलाड़ी ग्वालियर की थी। बेहतर प्रदर्शन के आधार तीन खिलाडिय़ों को भारतीय सीनियर कैंप के लिए बुलाया है। यह एकेडमी के बड़ी उपलब्धि है।