
भक्तों के लिए भगवान भी रोते हैं : साध्वी दीपिका
ग्वालियर. इंसान प्रयास तो सुख पाने का कर रहा है लेकिन उसे मिल दु:ख रहा है क्योंकि उसकी दिशा गलत है। यह विचार दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से फूलबाग मैदान में हो रही श्रीरामकथा में कथा व्यास दीपिका भारती ने अमृत की वर्षा करते हुए प्रथम दिवस व्यक्त किए। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और आयोजन अध्यक्ष राजेश सोलंकी ने दीप प्रज्जवलित कर कथा का शुभांरभ किया। इस मौके पर साध्वी दीपिका ने कहा कि अगस्त मुनि के आश्रम में जो श्रीराम कथा हुई थी, उसे सुनने के लिए महादेव भी आए थे। श्रीराम कथा का वर्णन वेदों में भी है। भगवान श्रीराम हमारे अंतर्मन में विराजमान हैं।
पुरुषों में भी संवेदना का संदेश दिया राम ने
कथा व्यास दीपिका भारती ने कहा कि माता सीता का हरण होने पर राम ने जब विलाप किया तो हमारे मन में सवाल आता है कि क्या भगवान भी विलाप करते हैं, पत्नी के वियोग में रो सकते हैं। भक्तों के विरह में भगवान भी दु:खी होते हैं। वे मनुष्य रूप में नरलीला कर रहे थे इसलिए उन्होंने ऐसा किया और यह संदेश भी दिया कि पुरूषों में भी संवेदना होती है। उनके नेत्र भी अपने प्रियजनों के लिए द्रवित हो सकते है़। श्रीराम के प्रति भक्तों का विलाप ही है जो उन्हें कथा पांडाल में खींच लाया है। उन्होंने आगे कहा कि गर्भ में आते ही जीवात्मा माया के वशीभूत हो जाती है। कोरोना काल में अमीरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हुई लेकिन गरीबों की नहीं क्योंकि गरीब मेहनत कर पसीना बहाता है।
इंसान को प्रेरणा देने का सामथ्र्य है रामकथा में
साध्वी दीपिका भारती ने कहा कि जिन्होंने जीवन में परमात्मा की खोज कर ली उन्हें फिर और किसी चीज की आवश्यकता नहीं होती। रामरस की वर्षा करते हुए साध्वी दीपिका ने कहा कि भगवान के धाम में भगवान की कथा नहीं है। इसलिए हनुमानजी ने मृत्युलोक में रहने का वरदान मांगा। जब तक पर्वत और नदियों का अस्तित्व रहेगा तब तक भगवान की कथा का प्रवाह होता रहेगा। रामकथा में इंसान को प्रेरणा प्रदान करने का सामथ्र्य है। भारत ही नहीं विश्व ने रामायण को अपनाया है। थाइलैंड, म्यांमार, कंबोडिया, थाइलैंड, रसिया में रामायण का अलग-अलग रूप में गुणगान हो रहा है। राम को सिर्फ मर्यादा पुरूषोत्तम ही नहीं परमात्मा के रूप में भी अपनाया गया।
विकृतियों का पर्दा उठाती है कथा
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सांसारिक जीवन में रहते हुए हमारे भीतर विकृतियां आ जाती हैं। रामकथा उन विकृतियों को मांजने का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने हमें मानव जीवन भोग के लिए नहीं योग के लिए दिया है। जिससे हम अपने जीवन का मार्ग जान अपने जीवन को मुक्ति के मार्ग में ले जा सकें।
Published on:
04 Jun 2023 10:43 pm
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