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शासन ने नहीं दिया जवाब, साडा की 16 बीघा जमीन हाथ से निकली

साडा की ओर से जवाब दिया गया कि उन्हें 2001 में यह जमीन प्रदान की गई थी। इसमें किसी भी तरह की कूट रचना नहीं की है। वादियों ने जमीन की चर्तुथ सीमा गलत बताई है।

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शासन ने नहीं दिया जवाब, साडा की 16 बीघा जमीन हाथ से निकली

शासन ने नहीं दिया जवाब, साडा की 16 बीघा जमीन हाथ से निकली

साडा (ग्वालियर क्षेत्र विकास प्राधिकरण) की 16 बीघा जमीन के मामले में शासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस जमीन के दावे में शासन ने अपना जवाब नहीं दिया, जिसके चलते कोर्ट ने शासन को एक पक्षीय करते हुए जमीन के मालिकाना हक पर फैसला सुना दिया। कोर्ट ने साडा की 16 बीमा जमीन को गब्बर व सरनाम सिंह की मानी है। 2001 में यह जमीन साडा को आवंटित की गई थी।

दरअसल ग्राम निरावली की सर्वे क्रमांक 537 (9 बीघा) व सर्वे क्रमांक 910,911,012,913, 914, 939, 918, 919 की 7.43 बीघा जमीन पर गब्बर व सरनाम सिंह ने दावा पेश किया। उनकी ओर से तर्क दिया कि 29 नवंबर 1953 को इस भूमि का उनके पूर्वजों को पट्टा मिला था। 1959 में बंदोबस्त लागू होने के बाद जमीन का मालिकाना हक मिल गया, लेकिन इस जमीन खसरे के खाना 12 में उन्हें अतिक्रमणकारी दर्ज कर दिया। उनकी जमीन को साडा को आवंटित कर दी। आवंटन से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया। इसलिए उन्हें जमीन का मालिकाना हक दिया जाए। कोर्ट ने साडा व जिला प्रशासन को नोटिस जारी किए। साडा की ओर से जवाब दिया गया कि उन्हें 2001 में यह जमीन प्रदान की गई थी। इसमें किसी भी तरह की कूट रचना नहीं की है। वादियों ने जमीन की चर्तुथ सीमा गलत बताई है। इसलिए दावे को खारिज किया जाए। शासन की ओर से जवाब नहीं दिया गया, जिसके चलते एक पक्षीय घोषित कर दिया। कोर्ट ने दावे को स्वीकार करते हुए गब्बर व सरनाम सिंह को जमीन का मालिक माना है।