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विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पांच साल बाद पीएमटी कांड के आरोपियों का चालान स्वीकार कर लिया। इसे विचारण के लिए विशेष सत्र न्यायालय में भेजा जाएगा। यह पीएमटी कांड का सबसे बड़ा चालान था। जिसकी जांच खत्म करने में सीबीआई को 5 साल लग गए थे।
दरअसल झांसी रोड थाना पुलिस ने 2013 में पीएमटी फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसमें 276 आरोपी बनाए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2015 में व्यापमं व पीएमटी कांड के सभी केस सीबीआई को हेंडओवर हो गए। सीबीआई ने सभी केस हेंडओवर कर अतिरिक्त जांच की। मध्य प्रदेश शासन बनाम गुलाब सिंह माथुर केस की जांच खत्म कर 31 जनवरी 2020 को चालान पेश किया। सीबीआई ने 200 लोगों को आरोपी बनाया। इस केस में परीक्षार्थियों के पिता बाहर कर दिया, जिससे आरोपियों की संख्या घट गई। जब सीबीआई ने चालान पेश किया था, उस वक्त कुछ आरोपी फरार थे। फरार आरोपियों को पकडऩे में सीबीआई को समय लग गया।
आरोपियों की मौत भी बनी थी रोडा
चालान में आरोपियों की संख्या अधिक है। इसमें आरोपियों की मौत भी रोडा बनी हुई थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां जैसे ही कार्रवाई आगे बढ़ती, वैसे ही किसी न किसी आरोपी की मौत हो जाती है। फौत रिपोर्ट आने तक केस की तारीख बढ़ रही थी।
- फरार आरोपियों को पकडऩे व मृत आरोपियों की फौत रिपोर्ट की वजह से चालान विशेष न्यायालय में अटका रहा। पांच साल बाद चालान स्वीकार हुआ है। विशेष सत्र न्यायालय में आरोप तय होने के बाद विचारण शुरू होगा।
- एक अन्य केस मध्य प्रदेश बनाम चांद खां बनाम मध्य प्रदेश शासन चालान में आरोप तय करने की प्रक्रिया चल रही है। पीएमटी कांड का दूसरा सबसे बड़ा चालान है।
Published on:
05 Sept 2025 11:18 am
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