
हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कोई सहानुभूति या नरमी नहीं दिखाई जा सकती- विक्रेता के साथ-साथ क्रेता को भी सजा सुनाई है
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने विवादित जमीन के मामले में बड़ा और सख्त फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि अदालत के आदेशों की अवहेलना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने अस्थायी निषेधाज्ञा (स्टे) के बावजूद जमीन की बिक्री को अवैध ठहराते हुए संबंधित बिक्री विलेख निरस्त कर दिए। साथ ही तीनों आरोपियों की संपत्तियों को एक वर्ष के लिए अटैच कर तहसीलदार को रिसीवर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा तीन महीने की सजा भी सुनाई है। वे अगले दिन सीजेएम के समक्ष पेश होकर तीन माह की सिविल कारावास की सजा भुगतें। 16 अप्रेल को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सरेंडर करना होगा।
दरअसल मामला कमला शर्मा द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप था कि हरियाणा बीड़ी उद्योग के संचालक गोपाल दत्त धोलाखंडी ने 9 दिसंबर 2015 के स्टे ऑर्डर के बावजूद विवादित संपत्ति का हिस्सा अन्य पक्षों को बेच दिया। सुनवाई के दौरान सामने आया कि यह सौदा मार्च 2023 में किया गया था, जबकि जमीन पहले से न्यायालय के आदेश के तहत संरक्षित थी। खरीदारों की ओर से यह दलील दी गई कि उन्हें स्टे ऑर्डर की जानकारी नहीं थी और उन्होंने जमीन को बोना फाइड (सच्चे खरीदार) तरीके से खरीदा। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह सिर्फ बाद में बनाया गया बचाव है। न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने न केवल जानकारी छिपाई, बल्कि कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए भ्रामक तथ्य भी प्रस्तुत किए।
बार बार न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश की
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि तीनों पक्षों ने बार-बार न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया और महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाया। इसी आधार पर कोर्ट ने उनकी बिना शर्त माफी को भी अस्वीकार कर दिया।
- विवादित जमीन के बिक्री विलेख को शून्य घोषित किया जाए और कलेक्टर को निर्देशित किया कि यदि कोई नामांतरण हुआ है तो उसे निरस्त कर यथास्थिति बहाल की जाए।
कोर्ट ने बसंत विहार निवासी गोपाल दत्त धोलाखंडी, मुरैना निवासी रामेंद्र सिंह, दक्षिणी दिल्ली निवासी दिलीप शर्मा को सजा सुनाई है। धोलाखंडी की 7 संपत्तियां अटैच की है। जबकि रामेंद्र सिंह की कृषि भूमि अटैच की है।
क्या है मामला
अधिवक्ता सर्वेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि कमला शर्मा व गोपाल दत्त धोलाखंडी भाई-बहन है। दोनों के बीच संपत्ति के बटवारे का विवाद चल रहा है। बहन के खिलाफ संपत्ति की डिक्री ले ली थी, जिसे बहन ने न्यायालय में चुनौती दी। कोर्ट ने संपत्ति विक्रय पर रोक लगाई थी, लेकिन गोपालदत्त ने बरा की संपत्ति रामेंद्र व दिलीप शर्मा को बेच दी। इसको लेकर कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। कोर्ट ने विक्रेता व क्रेता को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
Published on:
16 Apr 2026 11:10 am
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