ग्वालियर

मानसून सीजन के 42 दिन बीते, प्रशासन ने नहरें खोलने का नहीं लिया फैसला, धान की फसल हो सकती है प्रभावित

डबरा, भितरवार व मुरार में होती है नहरों से होती है धान की फसल

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Jul 13, 2023
जिले में हुई बारिश से जमीन व पहाड़ हरे हो गए हैं। पहाड़ के ऊपर से गुजरते बादल।

ग्वालियर. मानसून सीजन के 42 दिन बीत चुके हैं। बांधों में भी पानी आना शुरू हो गया है, लेकिन प्रशासन ने धान की खेती के लिए नहरें खोलने का फैसला नहीं लिया है। इस कारण जिले में धान की रोपाई शुरू नहीं हो सकी है। किसान नहरों के खिलने के इंतजार में है। क्योंकि पानी देर से मिलने पर खेती प्रभावित हो सकती है। देर से धान की रुपाई होने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

जिले में हरसी की पुरानी नहर व हरसी हाई लेवल नहर से धान के लिए पानी मिलता है। पुरानी नहर से डबरा व भितरवार के किसानों को पानी मिलता है, जबकि हरसी हाईलेवल नहर से भितरवार व मुरार के किसानों को धान के लिए पानी मिलता है। हर बार नहर 15 जुलाई तक खुल जाती थी, जिससे जुलाई में धान की रोपाई का शुरू हो जाता था और अगस्त के पहले सप्ताह में रोपाई का पूरा हो जाता था। जुलाई में रोपी गई धान अच्छा उत्पादन देती है। धान में पानी के लिए किसान जल संसाधन विभाग से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन कलेक्टर के साथ होने वाली बैठक नहीं हो सकी है। इस वजह से पानी छोडऩे का फैसला नहीं हुआ है। यह बैठक प्रशासन, जल संसाधन व किसानों के प्रतिनिधियों के साथ होती है।

धान से चलती है जिले की अर्थव्यवस्था

जिले में पैदा होने वाली धान दीपावली पर मंडियों में आना शुरू हो जाती है। धान की आवक से बाजार में भी बूम आता है, क्योंकि खरीफ की फसल आने पर बाजारों में खरीददारी बढ़ती है।

- जिले में खरीफ की जो फसल होती है, उसमें 60 फीसद से अधिक हिस्से पर धान होती है। जिले की अर्थव्यवस्था धान पर निर्भर करती है।

बांध भरा

मढीखेड़ा 42 फीसदी

पेहसारी 76 फीसदी

ककैटो 70 फीसदी

हरसी 66 फीसदी

अपर ककैटो 3 फीसदी

Published on:
13 Jul 2023 11:42 am
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