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MP: ये हैं ग्वालियर की दबंग महिलाएं, जरुरत पडऩे पर उठाई बंदूक

मिलिए शहर की दबंग महिलाओं से जिन्होनें खुद की और अपने परिवार की रक्षा के लिए बंदूक चलाना सीखा। धीरे-धीरे निशानेबाजी में इतनी सटीक हो गई की आज इनके नाम से भी बदमाश खौफ जदा हो जाते हैं।

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Gaurav Sen

Jul 16, 2016

dabang women of gwalior

dabang women of gwalior

ग्वालियर। मिलिए शहर की दबंग महिलाओं से जिन्होनें खुद की और अपने परिवार की रक्षा के लिए बंदूक चलाना सीखा। धीरे-धीरे निशानेबाजी में इतनी सटीक हो गई की आज इनके नाम से भी बदमाश खौफ जदा हो जाते हैं। अचूक निशाने और अपने दबंग स्टाईल के चलते शहर में इनके चर्चे हैं।

विद्यादेवी: उम्र पे नहीं हौसले को देखिए
मिलते हैं विद्यादेवी से इनकी उम्र पर जाना थोड़ा खतरा पैदा कर सकता है क्योंकि इतना निशाना इतना सटीक है कि कोई भी बदमाश इनसे उलझने से पहले हजारों बार सोचेगा। वे केवल घरेलू महिला नहीं है, बल्कि पूरे घर की रक्षक भी हैं। उनके निशाने की ख्याति के कारण बदमाश उनके घर के आसपास तक नहीं फटकते।



दूसरी महिला हैं लक्ष्मीदेवी एक दिन हुआं यूं कि वे अपनी कार में बंदूक लेकर बैठी हुई था। इतनें में कुछ बदमाश आये और कार में बैठी लक्ष्मीदेवी से बंदूक छीनने का प्रयास करने लगे। लेकिन लक्ष्मीदेवी ने बंदूक से हवाई फायर कर दिया। हवाई फायर सुन बदमाशों के होश उड़ गए और सभी बदमाश अपनी जान बचाकर भाग खड़े हुए। ग्वालियर-चंबल की महिलाओं में हथियारों का क्रेज बढऩे लगा है।



लाइसेंस मांगने वाली लेडीज की तेज़ी से बढ़ रही है संख्या..
विद्यादेवी और लक्ष्मी ही अकेली गन लेड़ी नहीं है, बल्कि ऐसी कई महिलाएं हैं, जो घर में रखी बंदूक चलाने में माहिर हैं।
ऐसे ही एक नाम है गुड्डी वैस। वे जब भी गांव जाती हैं तो उनके साथ लाइसेंसी बंदूक रहती है। मजाल है, कोई डकैत या बदमाश उनके पास फटक जाए। गुड्डी ने सुरक्षा के लिए हथियार थामा और आज वो बेख़ौफ़ होकर अपना सफर तय करती हैं।


सिक्यूरिटी गार्ड मिथलेश शर्मा
सिक्यूरिटी गार्ड मिथलेश शर्माको तो नौकरी ही इसी बंदूक के कारण मिली है और गेट पर खड़ा देखकर कोई बदमाश पास आने की हिम्मत नहीं करता है। मिथलेश बताती हैं कि वे चूल्हे पर जितनी अच्छी रोटी सेंकती हैं, उतना ही परफेक्ट निशाना भी लगा लेती हैं।



एक हजार से ज्यादा लाइसेंस वुमैन के नाम
शहर में बंदूक, खासतौर से पिस्टल के लाइसेंस की स्थिति पर नजर डालें तो अकेले ग्वालियर शहर में ही एक हजार से ज्यादा लाईसेंस महिलाओं के नाम पर हैं। इन महिलाओं के नाम पिस्टल का लाइसेंस है। कलेक्ट्रेट की हथियार शाखा के मुताबिक शहर के हाई प्रोफाईल लोगों के नाम पिस्टल और रिवाल्वर जैसे हथियारों के लाइसेंस हैं। इसमें महिलाओं की संख्या भी अच्छी-खासी है।

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महिलाओं की पहली पसंद है .32 बोर की पिस्टल या रिवाल्वर

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हालांकि इसकी कीमत कम से कम एक लाख रुपए होती है और बड़े परिवार की महिलाएं ही इसे खरीद पाती हैं। वैसे चंबल अंचल में जिस घर में बंदूक होती है, वहां की महिलाएं हालात में बंदूक चला लेती हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं कि डकैत आए, महिलाओं ने केवल फायर कर दिया, तो वे भाग गए।



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