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मंकीपॉक्स फैलने की आशंका बढ़ी, कटी स्किन से शरीर में करता है प्रवेश, ये हैं लक्षण

सीएमएचओ ने कहा सावधान रहने की जरूरत

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health department

ग्वालियर। कोरोना का असर कुछ कमजोर हो गया है, लेकिन अब मंकी पॉक्स से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। हालांकि प्रदेश में अभी मंकी पॉक्स संक्रमण का कोई भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन प्रदेश स्तर पर अलर्ट है। इसको देखते हुए सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने निर्देश दिए है कि संक्रमण पर बारिकी से नजर रखी जाए। मंकी पॉक्स जितनी तेजी से बढ़ता है, इसलिए संतर्कता काफी जरूरी है। मंकीपॉक्स एक वायरल जूनोटिक बीमारी है जो मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के वन क्षेत्रों में पायी जाती हैं।

यह है लक्षण

● मंकीपॉक्स के संक्रमित रोगी को सामान्यत: बुखार, रेश और लिम्फ नोड्स में सूजन पाई जाती है। कुछ रोगियों में चिकित्सकीय जटिलताएं हो सकती हैं।

● मंकीपॉक्स एक स्व-सीमित संक्रमण है। जिसके लक्षण सामान्यत: 2-4 सप्ताह में समाप्त हो जाते हैं। गंभीर प्रकरणों में मृत्यु दर 1-10 प्रतिशत है।

● मंकीपॉक्स वायरस पशुओं से मनुष्य में और मनुष्य से मनुष्य में भी फैल सकता है। उक्त वायरस कटी-कटी त्वचा या (आंख, नाक या मुंह) के माध्यम से शरीर मे प्रवेश करता है।

● मंकीपॉक्स का असर आमतौर पर 7-14 दिनों का होता है, लेकिन यह 5-21 दिनों तक हो सकता है और इस अवधि के दौरान व्यक्ति आमतौर पर संक्रामक नहीं होता है।

● संक्रमित व्यक्ति के चकत्ते दिखने से 1-2 दिन पहले तक रोग फैला सकता है। सभी चकत्तों से पपड़ी गिर न जाए रोगी तब तक संक्रामक बना रह सकता है।

चेचक टीका लगवाया है तो खतरा कम

विशेषज्ञों का कहना है कि मंकीपॉक्स पर नियंत्रण के लिए बिना भेदभाव जांच होनी चाहिए। एड्स रोकथाम व्यवस्था के तहत इसकी निगरानी होनी चाहिए। यह कोरोना से कम संक्रामक है। दावे किए जा रहे कि जिन लोगों ने चेचक का टीका लगवाया है, उन्हें यह नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआइवी) ने देशभर में 15 लैब खोली हैं। एनआइवी के पुणे परिसर में प्रशिक्षित विशेषज्ञ इन लैब में तैनात किए गए हैं। इसका मकसद समय पर सैंपल्स की जांच करना है, ताकि मरीजों का उचित उपचार किया जा सके। देश में मंकीपॉक्स के चार मरीज मिले हैं।

चेचक जैसे लक्षण

एनआइवी की निदेशक डॉ. प्रभा अब्राहम ने बताया कि हमने हर क्षेत्र में लैब खोली हैं। इनमें प्रशिक्षित विशेषज्ञ हैं। मंकीपॉक्स वायरल जूनोसिस (जानवरों से मनुष्य में फैलने वाला) है। इसमें चेचक जैसे लक्षण पाए गए हैं। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप तस्वीर में इसके विषाणु अंडाकार दिखाई देते हैं।