- Heart Attack: युवाओं में हार्ट अटैक की वजह बन रही है बदलती दिनचर्या और तनाव- सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में हार्ट अटैक के 40 फीसदी ज्यादा पहुंच रहे मरीज
ग्वालियर। कोरोना के बाद से हर किसी में कहीं न कहीं तनाव देखने को मिल रहा है। यह तनाव अंदर ही अंदर कई बीमारियों को पैदा कर रहा है। जिससे शरीर में नई- नई बीमारी होने लगी हैं। पहले 80 वर्ष के आसपास के लोगों में हार्ट अटैक की समस्या सबसे ज्यादा आती थी। लेकिन अब हालात यह हो गए है कि 35 वर्ष तक के युवाओं में हार्ट की सबसे ज्यादा परेशानी सामने आ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण कोरोना काल में बदली दिनचर्या के साथ ही लाइफ स्टाइल में बदलाव सामने आ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि युवा अवस्था में हार्ट की समस्या आना खतरे की घंटी है। अंचल के सबसे बड़े जेएएच के साथ शहर के निजी अस्पतालों में भी हार्ट के मरीजों की संख्या हर दिन बढ़ रही है।
फेफड़ों की जगह हार्ट पर पड़ रहा असर
कोरोना काल में सबसे ज्यादा लोग फेफड़ों की समस्या के चलते अस्पतालों में भर्ती हुए थे। लेकिन कोरोना अब लगभग खत्म होने के बाद फेफड़ों की जगह हार्ट पर सबसे ज्यादा अटैक कर रहा है। सभी अस्पतालों में फेफड़ों की बीमारी से ज्यादा हार्ट के मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी बात यह सामने आ रही है। कि अगर परिवार के किसी सदस्य को हार्ट अटैक आया है तो उस परिवार के लोगों को बड़ी सावधानी के साथ सभी का ख्याल रखना चाहिए।
समझदारी से बचाव
● हार्ट में कहीं भी दर्द होने पर तुंरत इलाज लें।
● शरीर का चेकअप समय- समय पर कराते रहे।
● सामान्य चक्कर आना, घबराहट या गैस बनने पर जांच कराएं।
● बाहर का खाना व तली हुई चीजें खाने से बचें।
हर दिन 50 से ज्यादा को आ रहा अटैक, इनमें युवा सबसे ज्यादा
हार्ट की समस्या वैसे तो सर्दी में बढ़ जाती है। लेकिन अब गर्मियों में भी हार्ट के मरीज बढ़ रहे हैं। जेएएच के कार्डियोलॉजी के साथ निजी अस्पतालों में हर दिन 50 से ज्यादा लोग हार्ट के पहुंच रहे हैं। इसमें युवा अवस्था के सबसे ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं।
छह साल के बच्चे को आया अटैक
हार्ट अटैक की समस्या तेजी से बढ़ रही है। सोमवार को खेरापति कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में छह वर्ष के बच्चे को हार्ट अटैक आया है। इस बच्चे को फेफड़ों की समस्या के चलते यहां पर भर्ती कराया गया था। वहीं बच्चे की हालत सही नहीं होने पर वेंटिलेटर भी लगाया गया। लेकिन अब छोटे बच्चे भी इस बीमारी से अछूते नहीं बचे हैं।
युवा अवस्था के बढ़ेंगे मरीज
डॉ. प्रतीक भदौरिया, कार्डियोलोजिस्ट, कल्याण हॉस्पिटल का कहना है कि कोरोना के बाद लोगों का खून में क्लोटिंग के मामले बढ़े हैं। इसमें युवा अवस्था में अंदेशा है कि आने वाले दिनों में हार्ट के मरीज बढ़ेंगे। अगर परिवार के किसी को हार्ट अटैक आया है तो अन्य लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
टेंशन बढ़ा कारण
डॉ. रवि डालमिया, कार्डियोलॉजिस्ट रतन ज्योति डालमिया हार्ट इंस्टीट्यूट का कहना है कि कोरोना काल में हर कोई किसी न किसी कारण से टेंशन में था। उसी के चलते अब असर देखने को मिल रहा है। इसमें युवा अवस्था में अब ज्यादा लोग शिकार हो रहे हैं। दिनचर्या के साथ खानपान को बदलने की जरूरत है।