
हाड़ कपाने वाली सर्दी ने बढ़ाई लोगों की टेंशन,पारा पहुंचा सबसे नीचे
ग्वालियर। उत्तरभारत में बर्फबारी के चलते जिला शीत लहर की चपेट में है। रविवार को पारा खिसक कर ६ डिग्री सेल्सियस पर आ जाने से कड़ाके की सर्दी का आगाज हो गया है। हाड़ कपाने वाली सर्दी के चलते न सिर्फ इंसान बल्कि जानवरों और परिदों की भी जान पर बन आयी है। सबसे अधिक परेशानी का सामना दो जून की रोटी के लिए भटकने वाले बेसहारों को उठाना पड़ रहा है। शहर में दो दो रैन बसेरा होने के बाद भी उनकी रात खुले आसमान के नीचे किसी मंदिर या दुकान के छज्जे के नीचे गुजर रही है।आज भी दिन की शुरूआत कड़ाके की सर्दी से हुई, वृद्धों को गर्मकपड़ों में लिपटे होने के बाद भी कपकपाते हुए देखा गया।
9 बजे सूर्यदेव का असर दिखा तो लोग सर्दी से बचने के लिए धूप में आ गए। ४ बजे तक तो तेज धूप के चलते राहत रही। लेकिन जैसे ही सूर्यदेव अस्त हुए वैसे ही सर्दी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। रात ८.३० बजे धुंध छा जाने से पारा खिसककर ६ डिग्री पर आ गया। नपा की ओर से शहर में एक सैकड़ा से अधिक सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था किए जाने के बाद भी सर्दीका सितम लोगों को हैरान कर रहा है। रात 9 बजे शहर की प्रमुख सडक़ों तथा प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। बाजार में सिर्फ चाय की दुकानें खुली नजर आई।
रजाई में लिपटने के बाद भी कपा रही सर्दहवाएं
शहर के मंशापूर्णहनुमान मंदिर पर आधा दर्जन बेसहारा वृद्ध रजाईयों और कंबलों में लिपटे दिखाई दिए। पास जाकर देखा तो उनका शरीर कांप रहा था। इनमें एक रामभरोसेे उम्र ७० ने बताया कि कहां जाएं।यहां पर भोजन की जुगाड़ हो जाती है।कभी कभार रात में कोईकंबल उड़ा जात है। मंदिर के इर्द-गिर्द करीब आधा दर्जन से अधिक बेसहारा ठंड से कांपते हुए दिखे।
अलाव ही सहारा
सदर बाजार में इमली वाली गली में कोहरे की धुंध के बीच एक दर्जन से अधिक लोग अलाव के सामने खड़े ताप रहे थे। इनमें से कई वृद्धों का शरीर ठंड के कारण कांप रहा था।इसी प्रकार अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी गरीबों को आग का सहारा लेना पड़ा। सर्दी के कारण लकड़ी के दामों में भी इजाफा हो गया है।
सदर बाजार में गायों के लिए की गई व्यवस्था
शहर के प्रमुख सदर बाजार में बहुत कम लोग दिखाई दिए। आवारा गायों को सर्दी से बचाने के लिए समाजसेवियों ने यहां पर चंदाकर अलाव की व्यवस्था की है। यहां पर एक दर्जन से अधिक गाय और सांड खड़े थे। सर्दी से सबसे अधिक परेशानी का सामना गोवंशीय पशुओं को ही करना पड़ रहा है।
"सर्दी से बचाव के लिए शहर में एक सैकड़ा से अधिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। आवश्यकता हुई तो कुछ ऐसे स्थानों पर भी अलाव शुरू किए जाएंगे जहां पर बेसहारा और मंदबुद्धि के लोग ज्यादा रहते हैं।"
जेएन पारा, सीएमओ नपा भिण्ड
Published on:
01 Jan 2019 08:01 am
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