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समंस और वारंट की तामीली के मामले में एसपी की रुचि नहीं

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा, पुलिस मुख्यालय के निर्देशों का कराएं पालन, आदेश की प्रति डीजीपी को भेजे जाने के निर्देश

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समंस और वारंट की तामीली के मामले में एसपी की रुचि नहीं

समंस और वारंट की तामीली के मामले में एसपी की रुचि नहीं

ग्वालियर। गवाह न्यायालय के आंख और कान होते हैं। लेकिन एसपी ग्वालियर नवनीत भसीन गवाहों के समंस, वारंट, जमानती वारंट तामील कराने के प्रति गंभीर नहीं है। इस मामले में एेसा लगता है कि उनकी इसमें रुची नहीं है। इससे यह स्पष्ट है कि पुलिस विभाग एेसे मामले में किसी की जिम्मेदारी तय करने के लिए तैयार नहीं है।

न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने सतेन्द्र सिकरवार के जमानत आवेदन को खारिज करते अपने आदेश में यह बात कही है। न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि इस मामले के सभी आदेशों की कॉपी पुलिस महानिदेशक भोपाल को भेजी जाए। इसके साथ ही न्यायालय ने एसपी ग्वालियर से गवाहों की तामीली कराए जाने के लिए जो सुझाव मांगे थे, उन्हें खारिज करते हुए यह निर्देश दिए हैं कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जो परिपत्र जारी किए गए हैं उनका प्रभावी तरीके से कार्यान्वयन किया जाए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि जो सुझाव दिए गए हैं वे गहराई से नहीं दिए गए हैं। इसमें गवाह की सुविधा का अधिक ध्यान रखा गया है जबकि चार-पांच साल बाद यदि कोई गवाह गवाही देने आएगा तो प्रकरण से संबंधित तथ्यों को कैसे देखेगा, इस पर कुछ नहीं कहा गया है। एसपी द्वारा अपने जवाब में कहा गया कि इस मामले में दो लोगों को निलंबित किया जा चुका है।

न्यायालय ने एसपी से मांगे थे सुझाव

हत्या के मामले में जेल में बंद आरोपी सत्येन्द्र सिकरवार के जमानत आवेदन पर सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि २१ अक्टूबर १९ को एसपी ग्वालियर को निर्देश दिए थे कि समन, वारंट जमानती वारंट की तामीली के लिए वे कुछ सुझाव दें। लेकिन एसपी के स्थान पर आंतरी में पदस्थ एसआई द्वारा आश्चर्यजनक रुप से शपथ पत्र पर सुझाव दिए गए हैं। जो विभाग के कहे बिना एेसा नहीं कर सकते थे। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि हर दिन न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन आ रहे हैं। लेकिन समंस, वारंट की तामील नहीं होने से इन मामलों का निराकरण नहीं हो पा रहा है। जबकि पुलिस मुख्यालय द्वारा ३० मार्च १९ व २१ मई १९ को सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए गए थे कि समंस की तामील समय पर की जाए। लेकिन मुख्यालय के इन परिपत्रों का पालन नहीं हो रहे हैं। इस पर न्यायालय ने एसपी को फिर निर्देश दिए कि पुलिस मुख्यालय द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में उन्होंने इस मामले में क्या किया।

न्यायालय ने एसआई के शपथ पत्र को किया निरस्त

न्यायालय ने शासन के आवेदन के बाद एसआई द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने कहा कि एसपी नवनीत भसीन से यह अपेक्षा थी कि वे इस ज्वलंत मुद्दे पर गंभीरता के साथ कदम उठाएंगे जिससे कि न्यायालय में अधिकारियों की लगातार उपस्थिति को टाला जा सके। हालांकि एसपी ने न्यायालय को बताया कि जो सुझाव दिए गए हैं वे उनके कार्यालय के विचार विमर्श के बाद तैयार किए गए हैं।