
ग्वालियर....पेड़ों की शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट सख्त, बोला-न रिकॉर्ड, न जानकारी, यह बेहद ही चिंताजनक
ग्वालियर. थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना में पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डबल बेंच ने हाउसिंग बोर्ड की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से रिकॉर्ड और जानकारी पेश की जा रही है, वह बेहद चिंताजनक है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिवादी अपने निर्णय का बचाव करने को लेकर गंभीर ही नहीं हैं। कोर्ट ने आवश्यक रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई बुधवार को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता सुनील पटेरिया ने थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस जीएस अहलुवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने की। सुनवाई के दौरान हाउसिंग बोर्ड कोर्ट द्वारा पूछे गए तीन महत्वपूर्ण सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, जिस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी की।
हाईकोर्ट ने मांगी ये चार अहम जानकारियां
पेड़ों की शिफ्टिंग का रिकॉर्ड
ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों की वास्तविक स्थिति दिखाने के लिए वीडियोग्राफी और फोटोग्राफ्स अदालत में पेश करने के निर्देश।
ठेकेदार की योग्यता
जिस मेसर्स रोहित नर्सरी को पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन का कार्य दिया गया, उसके अनुभव और तकनीकी योग्यता का रिकॉर्ड पेश करने को कहा गया।
सर्वाइवल रिपोर्ट
अदालत ने पूछा है कि अब तक कितने पेड़ जीवित हैं और कितने सूख चुके हैं। इसकी प्रमाणित रिपोर्ट पेश की जाए।
वैज्ञानिक प्रक्रिया का ब्यौरा
पेड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित करने में कौन-सी वैज्ञानिक पद्धति और प्रोटोकॉल अपनाया गया, इसका पूरा विवरण भी मांगा गया है।
Updated on:
23 Jun 2026 06:24 pm
Published on:
23 Jun 2026 06:23 pm
