
हाईकोर्ट ने कहा अदालत का समय बर्बाद करने शासन ने की अपील, लगाया एक लाख का हर्जाना,हाईकोर्ट ने कहा अदालत का समय बर्बाद करने शासन ने की अपील, लगाया एक लाख का हर्जाना,हाईकोर्ट ने कहा अदालत का समय बर्बाद करने शासन ने की अपील, लगाया एक लाख का हर्जाना,हाईकोर्ट ने कहा अदालत का समय बर्बाद करने शासन ने की अपील, लगाया एक लाख का हर्जाना,हाईकोर्ट ने कहा अदालत का समय बर्बाद करने शासन ने की अपील, लगाया एक लाख का हर्जाना
ग्वालियर। उच्च न्यायालय ने महिला आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी के मामले में एकल पीठ के आदेश के खिलाफ युगलपीठ में राज्य शासन द्वारा की गई अपील को गलत निर्णय मानते हुए एक लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। न्यायालय ने कहा कि यह अपील अदालत का समय बर्बाद करने के लिए प्रस्तुत की गई है। शासन के अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार है।
न्यायमूर्ति शील नागू तथा न्यायमूर्ति राजीव कुमार श्रीवास्तव ने राज्य शासन द्वारा की गई इस अपील को खारिज करते हुए आदेश की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव विधि विभाग को भेजते हुए इस प्रकरण उपचारात्मक कदम उठाए जाने के आदेश दिए हैं। जिससे की अनावश्यक याचिकाएं प्रस्तुत न की जा सकें।
एकल पीठ ने डॉ मोनिका शर्मा की याचिका को स्वीकार करते हुए मेडिकल बोर्ड द्वारा उन्हें नौकरी ज्वाइन नहीं कराने के लिए जो अनफिट सर्टिफिकेट जारी किया गया है उसे खारिज कर दिया था। इसके साथ ही एकलपीठ ने शासन को आदेश दिए थे कि याचिकाकर्ता को ४ मई१६ से ज्वाइन कराते हुए उन्हें सभी लाभ प्रदान करने तथा एरियर, वरिष्ठता एवं मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए। न्यायालय ने तीन माह में आदेश का पालन करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ राज्य शासन ने अपील प्रस्तुत की ।
यह था मामला
डॉ मोनिका शर्मा द्वारा मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के बाद उन्हें २५ अप्रैल १६ को आयुर्वेद चिकितस अधिकारी के पद पर ज्वाइनिंग देना थी। इस प्रक्रिया के दौरान याचिकाकर्ता डॉ मोनिका का २१ जनवरी १४ को विवाह हो गया। ज्वाइनिंग से पहले मेडिकल बोर्ड ने डॉ मोनिका के गर्भवती होने पर उन्हें ज्वाइन करने से अस्थाई अनफिट घोषित कर दिया। यह प्रमाण पत्र जोइंट डायरेक्टर स्वास्थ्य सेवाएं ग्वालियर संभाग द्वारा २३ मई १६ को जारी किया गया। बाद में २९ दिसंबर १६ को उन्हें ज्वाइन किया गया। डॉ मोनिका ने जब एकल पीठ में उक्त आदेश के खिलाफ याचिका पेश की थी तब शासन की ओर से कहा गया कि उन्हें अस्थाई तौर पर अनफिट गाइड लाइन के तहत घोषित किया गया था। एकल पीठ ने
शासन के इस आदेश को खारिज कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ अपील की गई थी।
चुनौती देना गलत निर्णय
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि जब कोई गंभीर स्थिति हो तब अनफिट सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी का एेसा कोई खतरनाक कार्य नहीं होता है कि जिससे कि उन्हें कार्य से रोका जा सके। इस प्रकार राज्य शासन ने एकलपीठ के निर्णय को चुनौती देकर गलत निर्णय लिया है। इस मामले में अपी की जरुरत ही नहीं थी।
हर्जाने की राशि से खरीदे जाएं हीटर
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में रजिस्ट्री को निर्देश दिए कि शासन द्वारा हर्जाने की राशि जमा कराए जाने पर उस राशि से पर्याप्त मात्रा में हीटर खरीद कर कोर्ट्स रुम में लगाए जाने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि हीटर किस कंपनी के होना चाहिए और किस स्तर के होना चाहिए। न्यायालय ने आदेश का पालन कर प्रतिपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए प्रकरण को शीतकालीन अवकाश के बाद ही लगाए जाने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि यदि हर्जाने की राशि मं से हीटर खरीदे जाने के बाद कुछ राशि बचती है तो उसे लीगल एड सेल में जमा कराई जाए।
Published on:
25 Dec 2019 02:48 pm
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