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सवा साल से परेशान सिनेमा मालिक यही हाल रहा तो बंद हो जाएंगे थिएटर

. एक समय में ग्वालियर को पहचान दिलाने वाले सिनेमा हाल अपना अस्तित्व खोते नजर आ रहे हैं। सवा साल से सिनेमा मालिकों का व्यापार बंद पड़ा है। उनके बिजली के बिल लगातार आ रहे हैं। इस दौरान उन्हें सरकार...

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सवा साल से परेशान सिनेमा मालिक यही हाल रहा तो बंद हो जाएंगे थिएटर

ग्वालियर. एक समय में ग्वालियर को पहचान दिलाने वाले सिनेमा हाल अपना अस्तित्व खोते नजर आ रहे हैं। सवा साल से सिनेमा मालिकों का व्यापार बंद पड़ा है। उनके बिजली के बिल लगातार आ रहे हैं। इस दौरान उन्हें सरकार की ओर से भी कोई मदद नहीं मिली। ऐसे में उनकी पीड़ा यह है कि अगर इसी तरह सिनेमा बंद रहे तो हो सकता है हम हमेशा के लिए बंद कर दें। क्योंकि आगे भी हमें सिनेमा से कोई आमदनी नजर नहीं आ रही है।

13 सिनेमा वक्त के साथ बंद हो गए
ग्वालियर में सिनेमा देखने के लिए दूर-दराज से लोग आते थे। टिकट के लिए लंबी लाइन लगती थीं। वर्तमान समय में 6 सिंगल स्क्रीन और 3 मल्टीप्लैक्स सिनेमा चल रहे हैं। वहीं अब तक 13 सिनेमा वक्त की मार नहीं झेल पाए और बंद हो गए। यदि यही बंद जैसी स्थिति रही, तो बाकी बचे सिनेमा का भी कोई भविष्य नहीं रह जाएगा।


फैक्ट फाइल
शहर का पहला सिनेमा- पहली टाकीज ग्वालियर थी, जो बंद हुई और उसे रिनोवेट कर कैलाश नाम दिया गया, जो कोरोना के पहले चलती रही।
बंद हो चुके सिनेमा- श्रीटॉकीज, अशोक टॉकीज, तानसेन, भारत, रीगल, रॉक्सी, जय हनुमान, बसंत, फिल्मिस्तान, चित्रा, यादव, हरिनिर्मल।
ये चल रहे सिनेमा- अल्पना, मानमंदिर, काजल, डिलाइट, कैलाश, फन, आइनॉक्स, गोल्ड, छोटू महाराज सिने कैफे।


बंद सिनेमा का भर रहे बिजली बिल
सवा साल से हम लोग परेशान हैं। सरकार की ओर से हमारे ऊपर कोई रहम नहीं किया गया। बिजली विभाग बिल देने में देरी नहीं करता। हम बंद सिनेमा का बिल भर रहे हैं। यदि इसी तरह सिनेमा नहीं खुले, तो शहर में चल रहे सिंगल स्क्रीन सिनेमा बंद होंगे। इनमें मैं भी शामिल रहूंगा।
संजय शाव, काजल सिनेमा


सरकार ने नहीं सुनी, ओटीटी ने तोड़ दी कमर
आज हर एक व्यक्ति के जेब में मोबाइल है। ओटीटी में फिल्में रिलीज हो रही हैं। लोग घर पर ही एलईडी और मोबाइल से फिल्में देख रहे हैं। ओटीटी के कारण हमारा बहुत नुकसान हुआ है। यदि यही स्थिति रही, तो पिछले दशकों में मनोरंजन का एकमात्र साधन सिनेमा खत्म हो जाएंगे।
अर्पित अग्रवाल, कैलाश सिनेमा


थिएटर खुले तो आने वाली फिल्मों से उम्मीदें
अब लोगों में सिनेमा आने का इंट्रेस्ट कम हुआ है। इस कोरोना ने हमारी और कमर तोड़ दी। राधे जैसी फिल्म ओटीटी पर रिलीज हो गई। अब हमें सूर्यवंशी, जर्सी, लाल सिंह चड्ढा, बेल बॉटम, सत्यमेव जयते-2 से उम्मीदें हैं। सरकार को जल्द ही हमें भी 50% क्षमता के साथ सिनेमा खोलने की अनुमति देना चाहिए।
बीएम रस्तोगी, भूतपूर्व संचालक, हरिनिर्मल


हम बार-बार लॉस नहीं उठा सकते
अभी मैं थिएटर ओपन नहीं कर रहा। क्या पता एक फिल्म खरीदूं और सरकार फिर बंद करा दे। सरकार से कोई मदद की उम्मीद तो कर नहीं सकते। इसलिए मैं तभी सिनेमा ओपन करूंगा, जब स्थितियां पूरी तरह सामान्य हो जाएंगी। हम बार-बार लॉस नहीं उठा सकते।
वरुण सक्सेना, संचालक, छोटू महाराज सिने कैफे