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MP ELETION 2018: 250 फीट तक के हो चुके अवैध खदानों के गड्ढे अब ले रहे जान… नेता खामोश

MP ELETION 2018: 250 फीट तक के हो चुके अवैध खदानों के गड्ढे अब ले रहे जान... नेता खामोश
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ग्वालियर

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Gaurav Sen

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Updated: 21 Oct 2018, 12:01 PM IST

illegal sand mining gwalior

MP ELETION 2018: 250 फीट तक के हो चुके अवैध खदानों के गड्ढे अब ले रहे जान... नेता खामोश

ग्वालियर। जिले की 168 पत्थर खदानों में से 50 से अधिक बंद खदानें अब मौत के गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। शहर के आसपास मौजूद 100 से 250 फीट तक गहरे इन गड्ढों में हर साल आठ से दस लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। हर साल लगभग 2 हजार करोड़ रुपए का कारोबार कर रहे पत्थर माफिया के लिए प्रशासन और राजनेता फायदा लेने के टूल बनकर रह गए हैं। 2009 से अचानक बढ़ी माफिया की मनमानी को रोकने में खनिज विभाग की पॉलिसी भी अक्षम साबित हुई है। स्थिति यह है कि माइनिंग के इस अवैध कारोबार का बड़ा हिस्सा ग्वालियर दक्षिण, ग्वालियर पूर्व, ग्वालियर ग्रामीण, डबरा विधानसभा में आता है, इसके बाद भी यहां के विधायक 10 साल में एक बार भी अवैध उत्खनन पर लगाम लगाने पुरजोर तरीके से विधानसभा तक नहीं पहुंचा सके।

राजनीतिक संरक्षण में चल रहे वैध-अवैध उत्खनन के लिए बीते चार सालों से बिलौआ चारागाह बना हुआ है। इससे पहले शहर के आवासीय क्षेत्र से लगे शताब्दीपुरम से सटी पीर बाबा की पहाड़ी काली गिट्टी के लिए कुख्यात थी। इसके लिए खदान माफिया ने 2003 से लीज की खदानों को अंतरित करके दूसरे की ओट में खनन का खेल की पूरी बिसात रचना शुरू कर दी थी। 2009 में इस व्यवसाय में बेतहाशा कमाई देखकर अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े छुटभैये भी कूद गए। वर्तमान में स्थिति यह है कि पत्थर के लिए सबसे बड़े क्षेत्र के रूप में पहचान रखने वाले बिलौआ में 70 फीसदी खदानों पर अंतरण से उत्खनन किया जा रहा है। अंतरण को लेकर खनिज विभाग की पॉलिसी भी माफिया की मददगार सिद्ध हुई है।








इन सवालों के जवाब न प्रशासन पर न सत्ता पर,दानों के गड्ढे हर साल ले लेते हैं आठ से दस लोगों की जान













87 खदानें बिलौआ क्षेत्र: क्रेशर आधारित पट्टे दे दिए
47 क्रेशर्स यहां काले पत्थर को गिट्टी में बदल रहे
40खदानयहां किस आधार पर खनन विभाग अनजान

जनप्रतिनिधियों ने इसके खिलाफ कभी नहीं उठाई दमदार आवाज

















ऐसे लग सकता है उत्पादन का अनुमान
47 क्रैशर हर माह: 60 हजार से 3 लाख यूनिट खपत

02यूनिट बिजली से 1 टन गिट्टी तैयार होती है


1.75लाख टन ऐसे एक बड़ा क्रैशर गिट्टी बना रहा है

पलीता

क्षेत्र में बिलौआ, रफादपुर, सूखा पठा, लदेरा, ऊ दरपाड़ा आदि क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में जिले का 80 फीसदी काला पत्थर निकल रहा है। खदानों के गड्ढों को दस से बीस गुना तक ज्यादा गहरा कर दिया गया है। विधायक ने इसको लेकर कोई गंभीर प्रतिक्रिया कभी व्यक्त नहीं की, न प्रशासन पर सुरक्षा के मानकों को लेकर दबाव बनाया।

क्षेत्र में पारसेन, बेरजा, बेहटा, जखारा, पदमपुर खेरिया और साडा क्षेत्र के गांव आते हैं। इन सभी जगहों पर काला पत्थर निकालने के लिए लगभग सारे नियम ताक पर काम किया जा रहा है। फिर भी विधायक ने कभी यह बात रेखंकित करने की कोशिश नहीं की कि यहां हो रहा काले पत्थर का व्यवसाय कितना वैध और कितना अवैध है।

माया सिंह, ग्वालियर पूर्व विधायक और नगर प्रशासन मंत्री

क्षेत्र में दीनदयाल-शताब्दीपुरम क्षेत्र में लगातार उत्खनन होता रहा है बीते कुछ समय से यहां उत्खनन बंद है, लेकिन खदान माफिया द्वारा किए गड्ढे हादसे का सबब बन सकते हैं। विधायक ने दीनदयाल नगर में दर्जनों बार दौरा किया, लेकिन एक बार भी आम जन की मुश्किलों पर ध्यान नहीं दिया। खदान विस्फोटों से यहां मकान दरके हुए हैं।

लाखन सिंह यादव, भितरवार विधायक

क्षेत्र घाटीगांव, बरई, मोहना सहित वन क्षेत्र के कई गांवों में सफेद पत्थर का अवैध उत्खनन लगातार जारी है। उत्खनन से जखौदा डेम पर खतरा बना है, वहीं नयागांव में बंद काले पत्थर की खदानें अब भी जानलेवा हैं। हर साल 7-8 लोग जान गंवाते हैं। हर साल औसतन 10 से 12 हमले वन विभाग की टीम पर माफिया करता है।

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