
जीवाजी विश्वविद्यालय ने वापस मांगा कैलाश नगर में बिके 33 प्लॉट का कब्जा, प्रशासनिक दल कठघरे में
ग्वालियर। महलगांव के सर्वे नंबर 869,871,872 में जीवाजी विश्वविद्यालय की जमीन है। भू माफिया ने जीवाजी विश्वविद्यालय की इस जमीन पर अवैध तरीके से 33 भूखंड बेच दिए थे। वर्ष 2016 में हुई जांच में जमीन विश्वविद्यालय की साबित होने के बाद वर्ष 2018 में कब्जा वापस दिलाने के लिए समिति बनी लेकिन प्रशासन ने कब्जा वापस नहीं दिलाया है। 1 अरब रुपए की इस जमीन से कब्जा हटाने के लिए पहले जेयू कुलसचिव ने लगातार पत्र लिखे और शुक्रवार को कुलपति प्रो.अविनाश तिवारी ने फिर से कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह को पत्र लिखकर जमीन वापस दिलाने का अनुरोध किया है। दरअसल, जीवाजी विश्वविद्यालय की बेशकीमती भूमि के मामले में प्रशासन लगातार सीमांकन विवाद की बात करके कब्जा दिलाने की कार्रवाई टालता रहा है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही एंटी माफिया अभियान के दौरान यह सामने आया था कि कैलाशनगर में जीवाजी विश्वविद्यालय की जमीन पर अवैध तरीके से भूखंड विक्रय किए गए हैं। इस अवैध विक्रय को लेकर कॉलोनाइजर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही जेयू को जमीन वापस मिली।
हो चुका है सीमांकन
-अधीक्षक भू अभिलेख ने 12 अप्रेल 2016 को सीमांकन दल का गठन करके 26 अप्रेल से 30 अप्रेल 2016 तक टोटल स्टेशन मशीन से सीमांकन किया गया। इसके बाद ग्वालियर तहसीलदार ने विश्वविद्यालय को बताया कि 65 प्लॉट पर कब्जा है, इनमें से 33 खाली हैं और 32 पर मकान बन चुके हैं।
-9 अप्रेल 2018 को 33 खाली प्लॉट पर जीवाजी विश्वविद्यालय को कब्जा दिलाने के लिए समिति का गठन किया गया। इस समिति में राजस्व निरीक्षक संजय अगरैया, दिलीप नागर और पटवारी अजय राणा और धर्मेन्द्र शर्मा शामिल थे। इस समिति ने अभी तक कब्जा नहीं दिलाया है।
इतने लिखे जा चुके हैं पत्र
-विवि के तत्कालीन कुलसचिव डॉ. आनंद मिश्रा ने 5 अप्रैल 2019, 3 जनवरी 2020, 19 नवंबर 2020 और 11 जनवरी और 29 फरवरी 2021 को कब्जा दिए सौंपे जाने को लेकर पत्र लिखे हैं।
-28 अप्रेल 2022 को एसडीएम झांसी रोड ने राजस्व निरीक्षक और पटवारियों के दल का गठन करके 9 अप्रेल को दोबारा सीमांकन की सूचना विश्वविद्यालय को दी। विवि प्रशासन ने दोबारा सीमांकन पर आपत्ति लगाई गई है और अतिक्रमण हटाने का अनुरोध किया गया है।
यह है कोर्ट का आदेश
-विवि कुलपति ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रकरण क्रमांक 39-ए/2014 योगेन्द्र पाल सिंह बनाम जीवाजी विश्वविद्यालय के में न्यायालय ने योगेन्द्रपाल के प्लॉट का सीमांकन करने का आदेश दिया है, इस पर विश्वविद्यालय को कोई आपत्ति नहीं है लेकिन बाकी की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए।
वर्सन
-कैलाश नगर में विश्वविद्यालय की जमीन है, इस पर कुछ लोगों ने कब्जा करके मकान बना लिए है। इस मामले में हमारे नोटिस के बाद कुछ लोग कोर्ट पहुंच गए थे, एक मामले में सीमांकन का आदेश हुआ है। इस सीमांकन में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन विश्वविद्यालय की बाकी की जमीन से अतिक्रमण हटाया जाना जरूरी है। कलेक्टर को पत्र लिखकर कब्जा वापस दिलाने की कार्रवाई करने के लिए लिखा है।
प्रो. अविनाश तिवारी-कुलपति, जीवाजी विश्वविद्यालय
-कैलाशनगर की भूमि में सीमांकन का विवाद है, यह मामला सिविल न्यायालय में भी गया है, अभी क्या स्टेटस है, यह पता करना पड़ेगा। जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति ने मदद मांगी है तो प्रशासन वैधानिक कार्रवाई करेगा।
कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
Published on:
01 Oct 2022 12:42 am
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
