
ग्वालियर। जीवाजी यूनिवर्सिटी (जेयू) प्रबंधन ने यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) की कैटेगरी-1 में आने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। इसके तहत विवि के अंदर शोधकार्यों के लिए शोधार्थी को लैब में कम से कम 10 घंटे गुजारने होंगे। विशेष शोधकार्यों के लिए कुलपति प्रो.संगीता शुक्ला ने डीन के साथ बैठक कर यह रणनीति बनाई। शोधकार्य के लिए करीब दो दर्जन सब्जेक्ट पर सहमति बनी है। इस कार्य के लिए प्रत्येक डिपार्टमेंट में टेस्ट के माध्यम से टॉप 50 छात्रों की पहचान की जाएगी। साथ ही विवि प्रबंधन ने शिक्षकों की नियुक्ति, पीजी सिलेबस का डिजाइन, ई-पुस्तकालय, हाईटेक प्रयोगशालाएं के साथ प्लेसमेंट के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। दरअसल यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ाने और ऑटोनॉमी प्रदान कर अधिकार संपन्न बनाने के लिए यूजीसी (कैटेगराइजेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज फॉर ग्रांट ऑफ ग्रेडेड ऑटोनॉमी) रेगुलेशन 2018 लागू कर दिया है, लेकिन इसमें जो शर्तें रखी हैं, उन पर खरा उतरने के लिए जेयू ने एक साल पूर्व से ही तैयारी शुरू कर दी है।
ऐसे समझें यूजीसी की नई व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत विवि को पहली कैटेगरी में आने के लिए नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (नैक) से 3.51 सीजीपीए से अधिक लाना होगा। दूसरी कैटेगरी के लिए सीजीपीए 3.26 से 3.50 के बीच होगा। एक अन्य नियम भी बनाया है, जिसमें विवि को टाइम्स हायर एजुकेशन की विश्व रैंकिंग में शामिल टॉप 500 में अपना स्थान बनाना होगा।
दोनों कैटेगरी के होंगे ये फायदे
1. ऐसे विवि को यूजीसी एक्ट 1956 की धारा 12 (बी) के तहत स्वत: ही मान्यता मिल जाएगी। इन विवि को किसी भी प्रकार के निरीक्षण की जरूरत नहीं होगी।
2.विवि यूजीसी से अनुदान प्राप्त किए बिना नए कोर्स, प्रोग्राम, विभाग, स्कूल, केंद्र शुरू कर सकेंगे। वे यूजीसी के अनुमोदन के बिना ऑफ कैंपस शुरू कर सकेंगे।
3. विवि यूजीसी के अनुमोदन के बिना ही स्किल कोर्सेस, ओपन रिसर्च पार्क, इंक्यूबेशन सेंटर, यूनिवर्सिटी सोसायटी लिंकेज सेंटर प्राइवेट पार्टनरशिप में खोल सकेंगे। विवि यूजीसी की अनुमति के बिना भी विदेशी फैकल्टी को आमंत्रित कर सकेंगे।
Published on:
09 Mar 2018 02:10 pm
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