
चुनावी प्रचार-प्रसार के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया का शाही अंदाज सामने आया है। महानवमीं और विजयादशमी के आगमन के उपलक्ष्य में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने परिवार के साथ कुल देवता का पूजन किया। वहीं आपको आज दशहरा के दिन राजशाही अंदाज में ही वे शमी पूजन कर पुरखों की परम्परा निभाएंगे। सिंधिया राजपरिवार की तरफ से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को गोरखी स्थित देवघर पहुंचकर कुलदेवता का पूजन किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पुत्र महाआर्यमन सिंधिया के साथ शाही पारंपरिक लिबास में देवस्थान पहुंचे और यहां शस्त्र पूजन कर विजयादशमी का पूजन किया। यहां सिंधिया परिवार के राज पुरोहितों ने उन्हें विधि-विधान के साथ पूजन कराया। सिंधिया के पहुंचने से पहले वहां उनकी पत्नी प्रियदर्शनी राजे पहुंची थीं। उन्होंने नवमीं की पूजा कर कन्या भोज कराया। मराठा परिवारों में तिथि के आधार पर दोपहर बाद से ही दशहरा मनाया गया, वहीं शहरभर में दशहरा का पर्व मंगलवार (24 अक्टूबर) को मनेगा।
शाम को शमी वृक्ष से सरदारों के लिए लुटाया सोना
केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शाम को मांढरे की माता पर पहुंचे। यहां राजघराने की 200 साल से ज्यादा पुरानी परंपरा का निर्वाह करते हुए राजसी पोशाक में पुत्र महाआर्यमन के साथ चबूतरे पर देव स्थापित करने के बाद पूजन किया। मंदिर के सामने मैदान में शमी वृक्ष के पास बैठकर सिंधिया परिवार के राज पुरोहित ने विधि-विधान के साथ पूजन कराया। उसके उपरांत सिंधिया ने राजघराने की तलवार को शमी वृक्ष से परंपरानुुसार स्पर्श किया। सोने का स्वरूप मानी जाने वाली शमी की पत्तियों को सरदारों ने लूटा और सिंधिया और उनके पुत्र को भेंट दी।
आपको बता दें कि हर साल सिंधिया राजशाही परिवार में दशहरा के दिन शमी पूजन किया जाता है। माना जाता है कि दशहरा के अवसर पर शमी पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन सिंधिया परिवार की ओर से दरबार लगाया जाता है। फिर देश में सुख-शांति की कामना की जाती है। इसी कामना के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया परंपरागत वेश-भूषा में शमी पूजन के लिए अपने पारंपरिक स्थल मांढरे की माता पर पहुंचेंगे। लोगों से मिलने के बाद वे शमी वृक्ष की पूजा करेंगे। एक बार फिर उनकी म्यान से तलवार निकलेगी जिसे वृक्ष को लगाया जाएगा। इससे शमी की पत्तियां टूटकर गिरेंगी और लोगों की भीड़ उन्हें लूटने टूट पड़ेगी। दरअसल लोग इन्हें सोने की पत्तियों का प्रतीक मानते हैं और अपने साथ ले जाते हैं। उनका मानना है कि ये पत्तियां घर में लाते ही उनकी धन-संपत्ति में भी बरकत होती है।
पढ़ें सिंधिया परिवार का राजशाही अंदाज
सिंधिया परिवार के मराठा सरदारों के मुताबिक, दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा सदियों पुरानी है. उस वक्त महाराजा अपने लाव-लश्कर व सरदारों के साथ महल से निकलते थे। सवारी गोरखी पहुंचती थी। यहां देव दर्शन के बाद शस्त्रों की पूजा की जाती थी। दोपहर तक यह सिलसिला चलता था। महाराज आते वक्त बग्घी पर सवार रहते थे। लौटते समय हाथी के हौदे पर बैठकर जाते थे। शाम को शमी वृक्ष की पूजा के बाद महाराज गोरखी में देव दर्शन के लिए जाते थे। वही परंपरा आज भी सिंधिया परिवार में निभाई जा रही है।
Updated on:
24 Oct 2023 08:44 am
Published on:
24 Oct 2023 08:43 am
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