
lakhhi mela organised at ratangarh mata mandir
दतिया, रतनगढड़ माता मंदिर पर लक्खी मेले में 20 लाख से ज्यादा लोगों ने पहुंच कर माता के दर्शन कर लाभ उठाया है। प्रशासन पूरी तरह से मेले को सफल बनाने के लिए मुस्तैदी से तैनात है। सोमवार से ही भक्तों का माता रतन के लिए पहुंचना शुरू हो गया था। लक्खी मेला भाई दूज के दिन होता है जिसमें दूर-दूर से लोग माता रानी के लिए दर्शन करने के लिए आते हैं। लक्खी मेला इस िलए भी खास है क्योंकि यहां सांप के काटने का इलाज है। सांप के दंश से पीडि़त लोग यहां आकर बंध कटवाके हैं कुंवर बाबा का आर्शीवाद लेते हैं।
सोमवार को रतनगढ़ माता मंदिर पर लक्खी मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने अंतिम रूप से निरीक्षण किया। मेले में दर्शनार्थियों को परेशानी न हो। इसके लिए सडक़ों पर तो पुलिस पेट्रोलिंग करेगीे ही। सिंध नदी में भी पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। एक दर्जन से ज्यादा नावों की व्यवस्था की गई है। घुड़सवार जवान भी गश्त करेंगे ताकि हादसे न हो सकें। तीन हजार से ज्यादा पुलिस व्यवस्था में लगाई गई है। सोमवार को भी परंपरागत मेला लगने से एक लाख से ज्यादा भक्त मंदिर पहुंचे। मेले पर सतत नजर रखने के लिए डीआईजी चंबल, कलेक्टर,व एसपी कैंप कर व्यवस्थाओं पर सतत नजर रखे हुए हैं। रात भर से प्रशासन व पुलिस की टीम वहां मौजूद है औैर मॉनीटरिंग कर रही है।
3000 से ज्यादा पुलिसबल तैनात, गोताखोरों की व्यवस्था भी
आईजी चंबल डीपी गुप्ता ने बताया कि मेले की सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। तीन हजार से ज्यादा पुलिसबल कानून व्यवस्था संभालने में तैनात है। डीआईजी,एसपी समेत अन्य अधिकारी कैंप पर मेले पर सतत नजर रख रहे हैं। नदी में नाव से पेट्रोलिंग व घुड़़सवार सैनिकों व गोताखोरों की व्यवस्था की गई है।
1000 से ज्यादा वालंटियर तैनात
कलेक्टर बीएस जामोद ने बताया, एक सैकड़ा से ज्यादा वालंटियर की मदद से मेला परिसर में लोगों की सेवा करेंगे। मेले की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। दो हजार से ज्यादा राजस्व अधिकारी मेले में सेवाएं देंगे। पुलिस बल के साथ-साथ एनडीआरएफ व उद्घोषक रहेंगे मौजूद।
सर्पदंश का जहर ऐसे उतरता है
रतनगढ़ मेले का महत्व इसलिए है कि सर्पदंश से पीडि़त लोग जैसे ही सिंध नदी के मेढ़पुरा घाट तक पहुंचते हैं कि नदी में नहाने के बाद उन पर बेहोशी हो जाती है। यहां से उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाते हैं। कुंअरबाबा मंदिर पर पहुंचते ही जब बेहोश पीडि़त पर जल छिडक़ा जाता है तो वह होश में आ जाता है। इसके साथ ही उसके शरीर का जहर भी उतर जाता है। मवेशियों के मामले में मेढ़घाट पर पहुंचते ही मवेशी की रस्सी बल खाने लगती है। मंदिर पर पहुंचने के बाद जल छिडक़ते ही कोसों दूर मौजूद मवेशी का जहर उतर जाता है।
डांग करेरा पर बांटा भोजन
मंदिर पर मेला भले ही एक दिन का होता है। लेकिन यहां के लिए निकलने वाले दर्शनार्थियों का सिलसिला दो दिन पहले से ही शुरू हो गया। मन्नत मांगने वाले हजारों लोग तो यहां कोसों दूर से पैदल ही जाते हैं। सोमनवार को भी दिन भर लोगों का पहुंचना जारी रखा। दर्शनार्थियों के लिए जलपान, चाय , खाना व नाश्ते की व्यवस्था भी जगह-जगह की गई। डांग करेरा पर पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की मौजूदगी में जिगना निवासी हंटू राजा परमार टीम ने सुबह से शाम तक भक्तों को भोजन का वितरण किया। इस दौरान छत्रपाल सिंह ,केशव सिंह परमार समेत अन्य लोगों ने व्यवस्था संभाली।
मंदिर माता रतनगढ़,1900 किलो का घंटा
सिंध नदी के किनारे लोगों की लगी भीड़
पहले दिन सोमवार को पहुंचे करीब एक लाख भक्त फ्लैश बैक: 2013 में हुआ था हादसा
13 अक्टूबर 2013 में रतनगढ़ लक्खी मेले में पुल टूटने की अफवाह उडऩे से एक सैकड़ा से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। इस हादसे में कई घायल हो गए थे। इसके पहले रतनगढ़ पर पुल न बनने की वजह से वर्ष 2006 के सितंबर माह में हादसा हुआ था। इस हादसे में जवारे लेकर जा रहे करीब 50 श्रद्धालु नदी का बहाव तेज होने से नदी में बह गए थे।
मंदिर के आसपास के एरिया का चित्र
सोमवार को रतनगढ़ का परंपरागत मेला होने के कारण शाम तक एक लाख से ज्यादा भक्त पहुंच चुके थे। सर्पदंश से पीडि़त लोगों की संख्या भी बढऩे लगी है। इसके लिए स्ट्रेचरों की व्यवस्था कर रखी है। ताकि लोगों को कुअंर बाबा मंदिर तक जाने में दिक्कत का सामना न करना पड़े।
Published on:
29 Oct 2019 01:27 pm
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