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ग्वालियर/शिवपुरी। पिछोर से 15 किमी दूर दिनारा रोड पर स्थित कमलेश्वर महादेव मंदिर आस्था का केंद्र है, जहां आने वाले भक्तों की मनोकामना भगवान शिव पूरी करते हैं। मंदिर के पुजारी प्रेमपुरी महाराज ने बताया कि जिस जगह शिवलिंग है,वहां वर्षों पूर्व बरगद के पेड़ के नीचे शिवलिंग की पूजा एक साधु करते थे। वे हर रोज गंगा नदी में स्नान करने जाते थे। एक दिन गंगा मैया ने साधु को सपना दिया कि तुम हर रोज नहाने मेरे पास आते हो,इसलिए मैं वहीं प्रकट हो जाती हूं। तभी से मंदिर के नीचे एक कुंड प्रकट हुआ, जिसमें हमेशा पानी रहता है।
गर्मियों में भी नहीं सूखता कुंड का पानी
मंदिर के नीचे स्थित कुंड में हर मौसम में पानी रहता है। फिर चाहे जैसी भीषण गर्मी पड़ रही हो तथा आसपास के ताल-तलैया सूख जाएं, लेकिन कुंड का पानी कभी नहीं सूखता।
मकर संक्रांति पर भरता है तीन दिवसीय मेला
कमलेश्वर मंदिर के नाम पर ही हर साल मकर संक्रांति पर तीन दिवसीय कमलेश्वर मेला भरता है। जिसमें पिछोर विधायक केपी सिंह द्वारा अखिल भारतीय कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन कराया जाता है। जिसमें कमलेश्वर केसरी व कमलेश्वर कुमार के नाम से पुरुस्कार दिए जाते हैं।
एक बार में 108 शिवलिंग का होता है अभिषेक
से दो किमी दूर बुरावली गांव के पास स्थित श्रीमंशापूर्ण महादेव शिवलिंग की खासियत है कि यहां एक शिवलिंग के अभिषेक करने भर से १०8 शिवलिंग का एक साथ अभिषेक हो जाता है। जिसकी वजह यह है कि शिवलिंग के चारों तरफ बनी जलई के ऊपर १०8 शिवलिंग पत्थर में उकेरे गए हैं। शिवलिंग लगभग एक हजार वर्ष पुराना बताया जाता है, जिस पर भारद्वाज परिवार के लोग वर्षों से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। सावन के महीने में इस शिवलिंग की खासियत की वजह से यहां प्रतिदिन ही अभिषेक चलते रहते हैं। इसके साथ ही लोग कांवड़ चढ़ाने भी पहुंचते हैं। मंशापूर्ण मंदिर बुरावली गांव से एक डेढ़ किलोमीटर खेतों की तरफ बना हुआ है। जहां पहुंचने तक के लिए मार्ग भी नहीं है। लोग खेतों की मेढ़ के जरिए ही यहां तक पहुंच पाते हैं। मंदिर के पुजारी बांकेलाल भारद्वाज ने बताया कि उनके पुर्वज भी मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे। इसका निर्माण किसने कराया, इसकी कोई जानकारी नहीं है। २५ वर्ष पूर्व मंदिर में मां गंगा की अष्टधातु की मूर्ति भी विराजमान थी। जिसके मुख से हमेशा ही गंगा रूपी जलधारा बहती रहती थी, लेकिन चोर उसे चुरा कर ले गए। सावन के महीने में यहां सर्प भी अक्सर दिखाई देता है जो महादेव के शिवलिंग के चारों तरफ कुंडली मारकर बैठ जाता है। ऐसी किवदंती है कि यहां वर्षों पूर्व किसी सिद्ध बाबा ने समाधि ली थी इस सर्प को उन्हीं का रूप माना जाता है। अभी तक इस सर्प ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है।
Published on:
03 Aug 2017 10:04 pm
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