
ग्वालियर। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने नवंबर महीने में बिजली बिल ऑनलाइन जमा करने पर पांच से बीस रुपए तक रियायत किए जाने के सपने दिखाए थे लेकिन, कंपनी ने उपभोक्ताओं को रियायत देने के बजाय छूट की राशि दबा ली और तीन महीने में करीब सात लाख रुपए अपने खाते में कर लिए। ऐसे उपभोक्ता रियायत की राशि लेने सीएम हेल्पलाइन तक में शिकायत कर रहे हैं।
एलटी ( निम्नदाब) उपभोक्ता प्रति महीने पांच से साढ़े पांच करोड़ रुपए ऑनलाइन बिजली बिल जमा कर रहे हैं। इस पर प्रति महीने ढाई से पौने तीन लाख रुपए की रियायत दी जानी चाहिए। नवंबर से अब तक करीब सात लाख की राशि की छूट उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए थी लेकिन बिजली कंपनी ने यह राशि दबा ली।
प्रति माह पांच से साढ़े पांच करोड़ जमा
बिजली कंपनी ने २३ नवंबर २०१७ को बिल का ऑनलाइन पेमेंट पर भोपाल, ग्वालियर और चंबल संभाग के निम्न दाब उपभोक्ताओं के लिए ५ रुपए से लेकर बीस रुपए तक रियायत दी जाने की घोषणा की थी। शहरी क्षेत्र में प्रति महीने २५ से २६ हजार उपभोक्ता ऑनलाइन करीब पांच से साढ़े पांच करोड़ जमा करते हैं।
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कोई डाटा नहीं : उपभोक्ताओं द्वारा राशि जमा करने के साथ ही बैक पेमेंट के तौर पर राशि उनके खाते में जाना चाहिए। अधिकारी बताते हैं कि यह राशि अगले माह के बिल में घटा दी जाती है जबकि एेसा कोई डाटा विभाग में तैयार नहीं किया। खुद आईटी कंपनी के अधिकारी एेसा डाटा होने को लेकर मना कर रहे हैं।
सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं
सूत्र बताते हैं कि मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी का एक जैसा सॉफ्टवेयर भोपाल और ग्वालियर रीजन में है। इन दोनों रीजन में भोपाल, होशंगाबाद और ग्वालियर शहर के अलावा चंबल संभाग के क्षेत्र का सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं किया गया है।
यही कारण है कि अब तक इन शहरों में ऑनलाइन बिल जमा करने वाले बिल में रिबेट बिजली कंपनी द्वारा नहीं दी जा रही है। शहरी क्षेत्र के अफसरों के पास एेसा कोई डाटा नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि शहर में ऑनलाइन बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को रिबेट के तौर पर कितनी राशि दी गई। बिजली कंपनी द्वारा ऑनलाइन बिल जमा
न करने पर कंपू निवासी एचके सिंह ने शिकायत की थी। यह शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की गई थी। इस शिकायत का समाधान करते हुए उप महाप्रबंधक मनीष गौतम ने रिबेट का लाभ भी उपभोक्ता को दिलाया।
रियायत के बारे में मुझे जानकारी नहीं
ऑनलाइन बिल जमा पर कंपनी द्वारा पांच से बीस रुपए तक की रियायत दी जा रही है। यह राशि उनके बिल में जुड़कर आती होगी। अब तक कितनों को रियायत मिली है, इस बारे में मेरे पास कोई जानकारी नहीं है।
अक्षय खरे, महाप्रबंधक, शहरी वृत्त, मप्रमक्षेविविकंलि
Published on:
10 Mar 2018 10:12 am
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