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प्रदेश का ऐतिहासिक महाराज बाड़ा बना राजनीति का अखाड़ा, ये है मुख्य कारण

प्रशासन 200 दुकानदारों को यहां से हटाना चाहती है लेकिन कांग्रेस के युवा विधायक की आपात्ति के बाद स्मार्ट सिटी योजना का काम रुका है।

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प्रदेश का ऐतिहासिक महाराज बाड़ा बना राजनीति का अखाड़ा, ये है मुख्य कारण

ग्वालियर। देश और प्रदेश में चंबल संभाग का हृदय स्थल कहा जाने वाला महाराज बाड़ा (maharaj bada ) इन दिनों राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। जहां नेता और अधिकारी आपस में खींचतान कर रहे हैं। हालात ये हैं कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत यहां पर करोड़ों के काम रूके पड़े हुए है। जिसकी ओर न तो अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और ना ही नेताजी।

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यहां होने वाले कामों की योजना पहले ही बन चुकी थी,लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ यहां के कांग्रेस विधायक अब इस योजना में बदलाव चाहते हैं और उनकी आपत्ति यहां के करीब 200 फुटकर दुकानदारों को हटाए जाने को लेकर है। अब स्थानीय विधायक स्मार्टसिटी योजना में अपने हिसाब से बदलाव चाहते हैं, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन तैयार नहीं है। लिहाज़ा यहां स्मार्टसिटी प्रोजेक्ट का काम पिछले 6 महीनों से रुका हुआ है जो अभी तक चालू नहीं हो पाया है।

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विधायक चाहते है योजना में बदलाव
ग्वालियर का महाराज बाड़ा सिंधिया रियासतकालीन समय का बना हुआ है। यहां अलग-अलग देशों की वास्तु कला के हिसाब से ऐतिहासिक इमारतें हैं। साथ ही यह वर्तमान में संभाग का सबसे बड़ा व्यापारिक बाजार भी है। यही कारण है कि प्रशासन चाहता है कि इसको एक बार फिर हैरिटेज लुक दिया जाए। इसके लिए यहां की पार्किंग और यातायात व्यवस्था में भी बदलाव होने हैं।

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जिसके लिए स्थानीय प्रशासन नगर निगम की मदद से करीब 200 फुटकर दुकानदारों को महाराज बाड़े से हटाकर किसी अन्य जगह पर ले जाना चाहता है, लेकिन ग्वालियर दक्षिण से कांग्रेस के युवा विधायक प्रवीण पाठक इन फुटपाथ वालों की रोजी रोटी का हवाला देते इस योजना में बदलाव चाहते हैं और उसके लिए वह मैदान में उतर चुके हैं।

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स्मार्ट सिटी के कार्यों में अड़ंगा
ग्वालियर दक्षिण विधायक प्रवीण पाठक का कहना है कि जो विकास कार्य महाराज बाड़े पर किए जाने हैं उनको लेकर यदि स्थानीय दुकानदार ही खुश नहीं हैं, ऐसे में यहां के विकास कार्यों का क्या फायदा ? वहां जो भी विकास कार्य होने हैं, उनमें आम लोगों की सहमति आवश्यक है।

वहीं वर्तमान में ग्वालियर सांसद विवेक नारायण शेजवलकर चाहते है कि शहर में स्मार्ट सिटी के तहत जो विकास कार्य किए जा रहे हैं, उसमें कांग्रेस के विधायक और मंत्रियों को सपोर्ट करना चाहिए, ना कि अड़ंगे डालना चाहिए। अगर कोई बेहतर सुझाव है, तो उसे मानने में प्रशासन को कोई परेशनी नहीं होनी चाहिए लेकिन अपनी हठधर्मिता के चलते कोई परिवर्तन कराना बिल्कुल गलत है और इसका विरोध होना चाहिए।

अब तक शुरू नहीं हो पाया काम
इस मामले को लेकर प्रशासन दबाव में नजर आ रहा है। जिसका यही कारण है कि कई बार प्रशासन विधायक के साथ महाराज बाड़े का निरीक्षण कर चुका है, लेकिन अभी भी काम शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि कलेक्टर का कहना है कि अभी विधायक, दुकानदरऔर फूटपाथ वालों से बात की जा रही है, जिसमें सब की सुविधा होगी उसी के अनुसार काम किए जाएंगे। जिसके चलते अभी कार्य रूका हुआ है।