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रंगीन कांच से बने टुकड़ों को कलात्मक रूप से जोड़कर की जाती है मीनाकारी

आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में मीनाकारी पर वर्कशॉप

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रंगीन कांच से बने टुकड़ों को कलात्मक रूप से जोड़कर की जाती है मीनाकारी

रंगीन कांच से बने टुकड़ों को कलात्मक रूप से जोड़कर की जाती है मीनाकारी

ग्वालियर.
मीनाकारी एक पुरानी और अति-प्रचलित टेक्नोलॉजी है। यह मुख्यत: आभूषणों और सजावटी कलाओं के ऊपर की जाती रही है। बदलते वक्त के साथ उन्नीसवीं शदी के बाद मीनाकारी का उपयोग इंडस्टियल प्रोडक्ट्स और रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं (जैसे क्रॉकरी आदि पर) पर भी किया जाने लगा। वास्तविकता में मीनाकारी विभिन्न प्रकार की पेंटिंग और अलंकृत करने की कला हैं, जो सोना, चांदी, ताबे आदि पर वाइब्रेंट कलर्स के साथ नाटकीय रूपांकनों में पक्षियों, फूल, पत्तियों को उकेरते हैं। मीनाकारी के विभिन्न प्रकार हैं, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि इनेमल कैसा है, पारर्शी, अपारदर्शी या पराभासी। पुरातन काल से कला जगत में अपनी विशेष राजसी पहचान बनाए रखने वाली मीनाकारी कला के बारे में कुछ ऐसी ही विशेष जानकारी दी जा रही थी मीनाकारी वर्कशॉप में। जिसे आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल ऑफ आट्र्स एंड डिजाइन के इंटीरियर डिपार्टमेंट द्वारा ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किय गया।

इसके अंतर्गत स्टूडेंट्स को मीनाकारी के इतिहास, उससे जुड़े रोचक तथ्य, मीनाकारी करने की प्रोसेस, सावधानियां आदि के बारे में बताया गया। स्टूडेंट्स ने इस दौरान कांच पर पेंट्स, ग्लिटर और थ्रीडी लाइनर के साथ कई डेकोरेटिव आइटम्स तैयार किए। खासकर डिजाइनर बोटल, कैनवास और फ्रेम को क्रिएटिविटी के साथ तैयार किया।

असिस्टेंट प्रोफेसर अश्विनी शर्मा के मुताबिक इस वर्कशॉप से स्टूडेंट्स खूबसूरत कला के बारे में जान पाए जिसे वे अपने इंटीरियर डिजाइनिंग के कॅरियर में भी बखूबी इस्तेमाल कर सकेंगे। वे सीख पाएंगे कि मीनाकारी डिजाइन करने के लिए वे इसका उपयोग माडर्न इंटीरियर में कैसे करें। फैकल्टीज द्वारा स्टूडेंट्स को बताया गया कि मीनाकारी रंगीन कांच से बने अलग-अलग टुकड़ों को कलात्मक रूप से जोड़कर की जाती है। इसका ग्लास कलर्ड पाउडर प्राप्त करने के लिए विभिन्न मिनरल ऑक्साइड का उपयोग किया जाता है। कांच का इस्तेमाल करने के अलावा विभिन्न प्रेशियस और सेमीप्रेशियस स्टोन के पाउडर का उपयोग भी कलरिंग के लिए किया जाता है।

इनामेल से दिखते हैं मणियों जैसे खूबसूरत रंग
मीनाकारी (इनामेलिंग) एक कलात्मक प्रक्रिया है। इसमें काच (ग्लास) के बारीक पाउडर को 750 डिग्री सेल्सियस से 850 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करके पिघलाकर ऑक्साइड मेटल जैसे चांदी, सोना, तांबा और जिंक के ऊपर क्रिस्टलीय पारदर्शी रूप में लगा दिया जाता है। तांबे, चांदी या सोने पर किए गए असली इनामेल से मणियों जैसे खूबसूरत रंग पैदा होते हैं। मीनाकारी का कार्य मूल्यवान व अद्र्धमूल्वान रत्नों तथा सोने व चांदी के आभूषणों पर किया जाता है। जयपुर में सोने के आभूषणों और खिलौनों पर बहुत सुंदर मीनाकारी की जाती है। यह एनामिल या रंग फीके नहीं पड़ते और गर्मी को सहन कर सकते हैं। इस नक्काशी में कटोरियां, मोमबत्ती स्टैंड, फ्रेम, चम्मच जैसी कई रोजमर्रा इस्तेमाल तथा सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं।