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‘मॉडर्न फुट स्टेप पॉवर जनरेशनÓ ह्यूमन एनर्जी को बदलेगा इलेक्ट्रिसिटी में

आइटीएम के सतीश और सोमनाथ ने बनाया सिस्टम

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'मॉडर्न फुट स्टेप पॉवर जनरेशनÓ ह्यूमन एनर्जी को बदलेगा इलेक्ट्रिसिटी में

'मॉडर्न फुट स्टेप पॉवर जनरेशनÓ ह्यूमन एनर्जी को बदलेगा इलेक्ट्रिसिटी में

ग्वालियर.

चलना, मानव जीवन के लिए सबसे कॉमन एक्टिविटी है। जब कोई व्यक्ति चलता है तो वह सड़क की सतह पर इम्पेक्ट, वाइब्रेशन, साउंड आदि के रूप में एनर्जी प्रोड्यूज करता है। सड़क की सतह पर अपने वजन को ट्रांसफर करने के कारण पैरों के माध्यम से हर कदम जमीन पर पूरी एनर्जी से पड़ता है। सोचिए अगर यही फुट इम्पेक्ट एनर्जी को हम इलेक्ट्रिसिटी के रूप में उपयोग कर सकें, तो कितना बेहतर होगा। इस सोच को प्रैक्टिकली इजाद किया आइटीएम यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल एंड कम्युनिकेशन के दो स्टूडेंट सतीश कुमार सिंह और सोमनाथ राय ने, जिसे उन्होंने माडर्न फुट स्टेप पॉवर जनरेशन नाम दिया है।

इलेक्ट्रिसिटी की जरूरत को पूरा करेगा सिस्टम
सतीश और सोमनाथ ने बताया कि इस फुट इम्पेक्ट एनर्जी को इलेक्ट्रिसिटी के तौर पर उपयोग के रूप में कन्वर्टेड किया जा सकता है। यह डिवाइस अगर फुटपाथ में एम्बेडेड की जाए तो इससे फुट एनर्जी को इलेक्ट्रिकल फॉर्म में बदला जा सकता है। उन्होंने बताया कि हमारा प्रोजेक्ट ह्यूमन एनर्जी को सेव करने और इसे इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदलने से सम्बंधित है। देश की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है, जिसके चलते इलेक्ट्रिसिटी की जरूरत भी बढ़ रही है।


सार्वजनिक स्थानों में रखकर कर सकेंगे एनर्जी जनरेट
यह प्रोजेक्ट सार्वजनिक स्थानों मल्टीप्लेक्स, रेलवे स्टेशन, शॉपिंग मॉल, मंदिर, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल आदि जगहों पर उपयोगी रहेंगे। इस सिस्टम को पब्लिक प्लेसेस या सार्वजनिक स्थानों पर रखा जाता है, जहां लोग पैदल चलते हैं और एंट्रेंस या एग्जिट के माध्यम से गुजरना पड़ता है। इस पर से फुट गुजरने पर फिर यह सिस्टम हर लेग के स्टेप पर वोल्टेज उत्पन्न कर सकता है। उस उद्देश्य के लिए पीजोइलेक्ट्रिक सेंसर का उपयोग इलेक्ट्रिकल सिग्नल में परिवर्तन द्वारा फोर्स, प्रेेेशर और एक्सलेशन मापने के लिए किया जाता है। यह सिस्टम एलईडी लाइट, वेट मेजरमेंट सिस्टम, सिस्टम के बेहतर प्रदर्शन के लिए व एक बैटरी को मापने के लिए वोल्टमीटर का उपयोग करता है।

वर्जन
ज्यादा एनर्जी से स्ट्रीट लाइट में भी कर सकेंगे उपयोग
यह सिस्टम नॉन कन्वेशनल सोर्सेस के रूप में स्टोर करके उसका उपयोग इलेक्ट्रिसिटी उत्पन्न करने के लिए एक माध्यम के रूप में कार्य करता है। इस एनर्जी को रिचार्जेबल बैटरी में स्टोर करते हैं। फिर उस स्टोर एनर्जी को आउटपुट लेकर कहीं भी उपयोग कर सकते हैं। स्ट्रीट लाइट तक में उपयोग कर सकते हैं अगर ज्यादा एनर्जी प्रॉड्यूस हुआ।
सतीश कुमार सिंह व सोमनाथ राय

उम्मीद है हमें इससे मिलेगा बेहतर समाधान
हमारे इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलोजी के स्टूडेंट्स हर बार बेहतरीन इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स तैयार करते हैं, जिससे इस क्षेत्र में नए आयाम तो खुलते ही हैं साथ ही कई तरह की प्रॉब्लम का सॉल्यूशन भी उसमें रहता है। यह सिस्टम भी लगातार बढ़ रही इलेक्ट्रिसिटी प्रॉब्लम के नए समाधान के रूप में है। जिसमें ह्यूमन एनर्जी का उपयोग किया गया है। उम्मीद है यह सिस्टम हम सभी के लिए उपयोगी साबित होगा।
डॉ रंजीत सिंह तोमर, डीन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी

45 से 50 दिनों में कर दिया यह सिस्टम तैयार
स्टूडेंट्स ने यह सिस्टम 45 से 50 दिनों में कम्पलीट कर लिया। इस सिस्टम को कई तरह से बना सकते हैं, लेकिन सबसे अफॉर्डेबल माइक्रोकंट्रोलर उपयोग करके तैयार करना है। बड़े रिर्सोसेज में कन्वर्ट करना महंगा रहेगा। स्टूडेंट्स ने इसी माइक्रोकंट्रोलर का उपयोग करके इसे 1200 रुपए तक में तैयार कर लिया।
मयंक शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन