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‘डॉक्टर मम्मी’ के साथ रहने से बच्चे का इंकार, कोर्ट में बोला- ‘पापा के साथ रहूंगा…’

Mp news: सिर्फ मां को दो महीने में एक बार बच्चे से मिलने की अनुमति होगी। पिता मिलने से नहीं रोकेंगे।

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Mp news: एमपी के ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने बच्चे की कस्टडी को लेकर दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है। बच्चे के विकास में बाधा नहीं आनी चाहिए। बाधा आती है तो समाज में अवांछित व्यक्ति बन जाएगा। इसलिए बच्चे के कल्याण को देखना चाहिए।

बच्चे से सवाल किया तो उसने कहा कि पिता के साथ ज्यादा खुश रहूंगा। बच्चा मां के साथ रहने में दिलचस्पी नहीं रखता है। कोर्ट ने बेटा आर्यन (परिवर्तित नाम) मां को देने से मना कर दिया।

पत्नी ने अपनी जिद के चलते ससुराल छोड़ा

सिर्फ मां को दो महीने में एक बार बच्चे से मिलने की अनुमति होगी। पिता मिलने से नहीं रोकेंगे। स्कूल की छुट्टी में मां के पास भी जा सकता है। डॉ. निशा शर्मा (परिवर्तित नाम) ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि वह शासकीय डॉक्टर हैं। वह अपने बच्चे का अच्छे से ध्यान रख सकती हैं। पति की ओर से तर्क दिया गया कि पत्नी ने अपनी जिद के चलते ससुराल छोड़ा है, बच्चों को अकेला छोड़ गई थी।

क्या है मामला

ग्वालियर के एक डॉक्टर दंपती को शादी के बाद 2002 में एक लड़की का जन्म हुआ। 2013 में बेटे आर्यन (परिवर्तित नाम) का जन्म हुआ। बेटे के जन्म के बाद पत्नी ने घर छोड़ दिया। बच्चा पिता के पास बड़ा हुआ। 2018 में पत्नी ने बच्चे की कस्टडी के लिए ग्वालियर के कुटुंब न्यायालय में वाद पेश किया, जिसे कोर्ट ने खारिज किया। इसके बाद कुटुंब न्यायालय के आदेश को मां ने हाईकोर्ट में अपील याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया।