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MP Promotion News: अधिकारी-कर्मचारी को मौत के बाद भी मिलेगा प्रमोशन, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

MP Promotion News: दशकों पुराने एक मामले की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जिससे राज्य भर के लाखों अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी।

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High Court Verdict on Appointments to Administrative Posts in MP Based on Seniority

High Court Verdict on Appointments to Administrative Posts in MP Based on Seniority (फोटो- Patrika.com)

MP news: एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने कर्मचारी और अधिकारियों के लिए बड़ी राहत लाने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति के अधिकार उसकी मृत्यु के साथ खत्म नहीं होते। इसी आधार पर कोर्ट ने दिवंगत वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी डॉ. राधाकृष्ण शर्मा को साल 2002 से प्रमोशन देने का आदेश दिया है। बता दें कि, डॉ. शर्मा का केस सालों पुराना है जो कि सिस्टम की बड़ी खामी को उजागर करता है।

क्या है पूरा मामला

डॉ. राधाकृष्ण शर्मा कृषि विकास विभाग में वरिष्ठ अधिकारी थे। साल 2002 में उनके पदोन्नति की बारी आई तो उनके जूनियर अधिकारियों का प्रमोशन कर आगे बढ़ा दिया गया। डॉ. शर्मा ने जब इसकी शिकायत कि तो विभाग ने कहा कि उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है और उनकी एनसीआर भी संतोषजनक नहीं है जिसके कारण उनके प्रमोशन को रोक दिया गया हैं। कुछ समय बाद विभाग द्वारा दिया गया तर्क भी कमजोर पड़ गया क्योंकि डॉ. शर्मा कुछ समय बाद उस आपराधिक मामले से पूरी तरह बरी हो गए। मामले में बरी होने के बावजूद विभाग ने उनका प्रमोशन नहीं किया।इसी के बाद से शुरू हुई एक लंबी कानूनी लड़ाई। विभाग ने जब प्रमोशन करने से मना कर दिया तब साल 2008 में डॉ. शर्मा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन फैसला आने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद डॉ. राधाकृष्ण शर्मा के बेटे रमन ने इस लड़ाई को आगे बढ़ाया।

हाईकोर्ट ने जाहिर कि नाराजगी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभाग के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी भी कर्मचारी को विभाग की लापरवाही की वजह से उसका हक नहीं मिलता तो उसका पूरा नुकसान भरना होगा। जज ने आगे कहा कि ऐसी मामलों में 'नो वर्क, नो पे' नियम लागू नहीं होता। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जानकारी दिए बिना किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की एसीआर को आधार बनाकर उसका प्रमोशन रोकना पूरी तरह गलत है। ये संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला

कोर्ट ने अंत में एक ऐतिहासिक आदेश दिया। कोर्ट ने आदेश में विभाग को निर्देश दिया डॉ. राधाकृष्ण शर्मा को 28 अक्टूबर 2002 से पदोन्नत माना जाए। इसके अलावा उस तारीख से मिलने वाले सभी वेतन, एरियर, वरिष्ठता, लाभ भी उनके परिवार को दिया जाए। हाईकोर्ट के इस एक फैसले ने प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और अधिकारीयों को बड़ी राहत दी है। (MP news)