सिंधिया रियासत के खजांची थे अमरचंद बांठिया का
ग्वालियर। 1857 की क्रान्ति में अतुलनीय योगदान देने वाले शहीद अमरचंद बांठिया की शहादत स्थली पर शुक्रवार को दोपहर के समय कचरा पड़ा होने के साथ-साथ उनकी प्रतिमा के आसपास काफी धूल जमा थी। 18 जून 1858 को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान के बाद उनकी सेना के लिए ग्वालियर रियासत के खजाने को लुटा देने वाले अमरचंद बंठिया का 22 जून शनिवार को बलिदान दिवस भी है। ऐसे में शहरवासी यहां आएंगे और बांठिया को श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे। पर एक शहीद को श्रद्धांजिल देने से पहले उनकी शहादत स्थली पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि वर्ष भर यहां ऐसे ही हालात बने रहते हैं।
श्रद्धांजलि सभा आज
शहीद अमरचंद बांठिया के बलिदान दिवस पर 22 जून को सुबह 9 बजे सराफा बाजार स्थित उनके शहीदी स्थल पर सार्वजनिक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है। नगर निगम एवं हिन्दू महासभा के सहयोग से शहीद अमरचंद बांठिया स्मारक समिति के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
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कौन थे बांठिया
आजादी के लिए असंख्य लोगों ने कुर्बानियां दी थीं। इनमें एक नाम ग्वालियर में सिंधिया रियासत के खजांची अमरचंद बांठिया का भी है। अंग्रेजों के खिलाफ 1858 में झांसी की रानी के नेतृत्व में जंग लड़ रहे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए अमरचंद ने भामाशाह बन कर ग्वालियर रियासत का खजाना लुटा दिया था। अंग्रेजों ने 22 जून को सरेराह इन्हें सराफा बाजार स्थित नीम के पेड़ पर फांसी पर लटका दिया था।
ग्वालियर में है रानी लभ्मी बाई की छतरी
1857 के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी योद्धा झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की छतरी ग्वालियर में फूलबाग के पास बनी हुई है। यहां उनकी प्रतिमा विशाल चट्टान पर बनी हुई है। रानी लक्ष्मीबाई पार्क से मशहूर इस जगह पर टूरिस्ट घूमने के लिए आते हैं।