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कोरम के अभाव में परिषद स्थगित, रणनीति बनी, पर सदन खाली; 23 मार्च तक टली बहस

बैठक टलने से नगर निगम के कई अहम विकास और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा एक बार फिर अधर में लटक गई नगर निगम परिषद की बैठक में एक बार फिर सियासी रणनीति तो बनी, लेकिन अमल में नहीं आ सकी। विपक्षी पार्षद अफसरों को पुराने ठहरावों पर घेरने की तैयारी से गए जरूर, पर सदन […]

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nagar nigam parishad

अपनी मांगों को लेकर निगम परिषद कार्यालय पर धरना देते कर्मचारी।

बैठक टलने से नगर निगम के कई अहम विकास और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा एक बार फिर अधर में लटक गई

नगर निगम परिषद की बैठक में एक बार फिर सियासी रणनीति तो बनी, लेकिन अमल में नहीं आ सकी। विपक्षी पार्षद अफसरों को पुराने ठहरावों पर घेरने की तैयारी से गए जरूर, पर सदन तक नहीं पहुंचे। नतीजा परिषद कक्ष में भाजपा-कांग्रेस के सिर्फ तीन-चार पार्षद ही मौजूद रहे और सभापति मनोज सिंह तोमर ने कोरम के अभाव में बैठक को 23 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया। बैठक टलने से नगर निगम के कई अहम विकास और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा एक बार फिर अधर में लटक गई। जानकारों का कहना है कि परिषद शुरू होने से पहले ही कम उपस्थिति की आशंका थी, ताकि बैठक स्थगित होने से अफसरों पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि, इससे विपक्ष की रणनीति भी अधूरी रह गई।

अफसरों को घेरने की थी तैयारी
विपक्ष दो प्रमुख ठहरावों को लेकर आक्रामक रुख अपनाने की रणनीति बना चुका था। इसमें कार्यपालन यंत्री रजनीश देवेश और अभिषेक भदौरिया की सेवाएं मूल विभाग को सौंपने का ठहराव परिषद पहले ही पारित कर चुकी है, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ। जबकि क्षेत्रीय अधिकारी प्रगति गोस्वामी और तनुजा वर्मा के वेतन आहरण पर लगी रोक के मामले में भी परिषद के निर्णय के बावजूद आदेशों का पालन न होने पर सवाल उठाने की तैयारी थी। विपक्ष का इरादा था कि सदन में अफसरों की जवाबदेही तय की जाए और ठहरावों की अनदेखी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया जाए।

नेता प्रतिपक्ष के चैंबर में बैठी रही रणनीति
बैठक से पहले नेता प्रतिपक्ष हरिपाल के चैंबर में विपक्षी पार्षदों के बीच रणनीति पर चर्चा होती रही, लेकिन तालमेल की कमी के चलते वे परिषद कक्ष तक नहीं पहुंचे। तय समय तक आवश्यक संख्या में पार्षद मौजूद नहीं होने से बैठक स्थगित करनी पड़ी।

ठहरावों के पालन पर पहले भी उठे सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब परिषद में पारित निर्णयों के पालन पर सवाल खड़े हुए हों। पूर्व में भी पार्षद प्रशासन पर परिषद की अनदेखी के आरोप लगा चुके हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें 23 मार्च को होने वाली अगली बैठक पर टिकी हैं।

वेतन न मिलने से कर्मचारियों ने जताया विरोध,सभापति ने दिया आश्वसन
इधर, वेतन न मिलने से नाराज नगर निगम के विनियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों ने शुक्रवार को जलविहार स्थित परिषद कक्ष में जोरदार प्रदर्शन किया और गेट बंद कर निगम परिषद का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने आटे, नमक, चावल और दाल के खाली कनस्टर (टीन) बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया। उनकी मांग थी कि कई महीनों से वेतन न मिलने के कारण उनके घरों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। प्रदर्शनकारी कर्मचारी निगम कार्यालय के मुख्य गेट पर तख्तियां लेकर धरने पर बैठ गए। सूचना मिलने पर सभापति मनोज सिंह तोमर, नेता प्रतिपक्ष हरिपाल, पार्षद गिर्राज सिंह गुर्जर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी वेतन संबंधी समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा।