डेढ़ करोड़ की लागत से खरीदे गए थे 26 टूविनइन डस्टबिन
ग्वालियर। स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में शहर को साफ सफाई में बेहतर रैंकिंग दिलाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन शाखा यएसबीएम शाखाद्ध की ओर से करीब डेढ़ की लागत से 2600 ट्विन बिन डस्टबिन खरीदे गए। बाद में इन डस्टबिन को शहर के विभिन्न चौराह व स्थानोंए आमजनए दुकानदारों व व्यापारियों को बांटे गए। लेकिन निगम के जिम्मेदारों द्वारा विभिन्न स्थानों पर लगाए गए डस्टबिनों पर ध्यान नहीं दिए जाने से यह ट्विन बिन डस्टबिन अब शहरभर में कहीं भी नजर ही नहीं आ रहे है। जबकि शहर में अभी भी गार्बेज फ्री सिटी और सफाई सुरक्षा मित्र का सर्वे करने के लिए केंद्रीय दल की टीम को आना है। लेकिन उससे पहले यह ट्विन बिन डस्टबिन ही गायब हो गए है।
ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में निगम के अंक भी कट सकते है। बता दें कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 के लिए नगर निगम की परीक्षा 9500 अंकों की होगी। इसमें से अब तक वाटर प्लस और स्वच्छ सर्वेक्षण का सर्वे टीम कर चुकी है और अब गार्बेज फ्री सिटी और सफाई सुरक्षा मित्र की टीम अक्टूबर में सर्वे करने के लिए आएगी। यह टीम 1250 अंकों के लिए गार्बेज फ्री सिटी और 375 अंकों के लिए सफाई सुरक्षा मित्र का सर्वे करेगी। टीम सर्वे के दौरान सैफ्टिक टैंक की साफ सफाईए गीलाण्सूखा कचरा अलगण्लअग करनेए सफाई कर्मियों के पास सुरक्षा के उपकरणए ड्रेस कोर्ड सहित विभिन्न बिंदुओं की जांच करेगी। इस दौरान टीम आमजन से साफ सफाई पर फीडबैकए कचरा कलेक्शन व घरण्घर डोर टू डोर से जुड़े सवाल पूछेगी।
हैंडकार्ट भी नहीं आते शहर में नजर
स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए निगम ने प्रत्येक वार्ड की सकरी गलियों में हाथ ठेला यहैंडकार्टद्ध के माध्यम से कचरे का कलेक्शन करने के लिए हाथठेला व डस्टबिन भी खरीदे। लेकिन हाथठेला यहैंडकार्टद्ध व डस्टबिन भी कहीं नजर नहीं आते है। जबकि निगम ने 3000 डस्टबिन 14 लाख 97 हजार रुपए में और सकरी गलीण्मोहल्ले में कचरे के कलेक्शन के लिए 500 हाथठेले यहैंडकार्टद्ध 27 लाख 50 हजार की लागत से खरीदे गए हैं। एक हाथठेले की कीमत 5500 रुपए हैं और इन हाथठेला में चारण्चार डस्टबिन गीलाए सूखाए जैविक व बल्फएटयूबलाइट सहित अन्य सामान को रखने के लिए लगाया गया था और इसमें लगाई गइ एक डस्टबिन की कीमत 499 रुपए थी। लेकिन यह हैंडकार्ट भी अब कहीं नजर नहीं आते है।
डस्टबिन गायब होने के कारण
नगर निगम के जिम्मेदारों द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने से अधिकांश डस्टबिन टूट गए तो कुछ लोग चुराकर अपने घर ले गए। वहीं कई जानवरों व वाहन चालकों ने तोड़ दिए। इससे डस्टबिन लगाए जाने वाले स्थान पर सिर्फ लोहे के छोटेण्छोटे खंभे ही नजर आते है।
"कुछ डस्टबिन टूट गए है तो कुछ डस्टबिन गायब हो गए है। हम जल्द ही अभियान चलाकर सभी डस्टबिन को सही करेंगे। वहीं जिन स्थानों पर डस्टबिन नहीं है वहां पर लगाए जाएंगे।"
अमरसत्य गुप्ताउपायुक्त नगर निगम