
20 महिलाओं को होश आने से पहले किया डिस्चार्ज,कुछ ऐसा हुआ इनके साथ
ग्वालियर। चंबल संभाग के भिण्ड के जिला अस्पताल में नसबंदी कराने वाली महिलाओं के साथ प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। 20 महिलाओंं को एनस्थीशिया देने के बाद होश आने से पहले ही वार्ड से डिस्चार्ज कर दिया गया। महिलाएं किसी प्रकार उठते गिरते घर तक पहुंची। महिलाओं के ऑपरेशन थियेटर में पहुंचने के बाद ही आशा और ऊषा कार्यकर्ताएं भी अपना मानदेय लेकर गायब हो गईं।
शुक्रवार को जिला अस्पताल में लगाए गए शिविर में ग्रामीण क्षेत्र की 30 से 45 साल उम्र की महिलाओं को नसबंदी के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। नसबंदी करने के बाद पलंग पर महिलाओं को बमुश्किल 30 मिनट ही रखने के बाद वार्ड से डिस्चार्ज कर दिया गया।
एनस्थीशिया का असर पूर्ण रूप से खत्म न होने के कारण आधा दर्जन से अधिक महिलाएं कैंपस में ही लडखड़़ाकर गिर गईं। वहीं कुछ महिलाओं को उनके परिवार की महिलाएं सहारा देकर बाहर लाईं और सडक़ पर घर पहुंचने के लिए वाहनों की तलाश करती देखी गईं।
कम से कम चार घंटे वार्ड में रोकना चाहिए, होश आने में लगता है समय
नसबंदी का माइनर ऑपरेशन होता है, महिला को बेहोश करने के लिए फोर्टविन इंजेक्शन दिया जाता है। इसका प्रभाव करीब 4 घंटे तक रहता है।
असर खत्म हो जाने के बाद ही डिस्चार्ज किया जाता है। नसबंदी कराने वाली महिलाओं को खाली पेट आने के लिए कहा जाता है। खाना न खाने तथा इंजेक्शन के असर से महिलाएं कई घंटों तक कमजोरी महसूस करती हैं। समय से पहले डिस्चार्ज किए जाने से महिला को खतरा होने की पूरी संभावना रहती है।
Published on:
01 Dec 2018 03:01 pm
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