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ग्वालियर में मनाया गया गोडसे का 70 वां बलिदान दिवस, कार्यकर्ता बोले- नाथूराम ने किया गांधी का वध

Nathuram godse 70th balidandiwas celebration by hindu mahasabha office : कार्यालय में मौजूद लोगों ने नाथूराम गोडसे को गांधी की हत्या का आरोपी न मानते हुए कहा कि- वह हत्या नहीं वध था। देश के लिए नाथूराम गोडसे ने सही काम किया था। गांधी की गलत नीतियों के कारण देश का हाल बुरा है।

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Nathuram godse 70th balidandiwas celebration by hindu mahasabha office

Nathuram godse 70th balidandiwas celebration by hindu mahasabha office

ग्वालियर. ग्वालियर में हिंदू महासभा के कार्यालय में नाथूराम गोडसे व नारायण आप्टे का 70 वां बलिदान दिवस मनाया है। कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं ने दोनों की तस्वीरों की पूजा की व आरती उतारी। नाथूराम गोडसे व नारायण आप्टे को हुतात्मा संबोधित किया। कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं ने पूजा करते समय आरती भी उतारी व नारेबाजी की। इस दौरान कई लोग वहां मौजूद रहे।

गांधी की हत्या को बताया वध
कार्यालय में मौजूद लोगों ने नाथूराम गोडसे को गांधी की हत्या का आरोपी न मानते हुए कहा कि- वह हत्या नहीं वध था। देश के लिए नाथूराम गोडसे ने सही काम किया था। गांधी की गलत नीतियों के कारण देश का हाल बुरा है। आपको बतां दें कि एक साल पहले इसी कार्यालय में नाथूराम गौडसे की प्रतिमा स्थापित की गई थी। जिसके चलते काफी विरोध हुआ था। हालांकि प्रशासन ने बल की मदद से नाथूराम गोडसे की मूर्ति वहां से हटवा दी थी।

गोडसे ने अदालत को यह बताई थी हत्या की वजह
अदालत में चले ट्रायल के दौरान नाथूराम ने महात्मा गांधी की हत्या की बात स्वीकार कर ली थी। कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए गोडसे ने कहा था कि गांधी जी ने देश की जो सेवा की है, मैं उसका आदर करता हूं। उन पर गोली चलाने से पूर्व मैं उनके सम्मान में इसीलिए नतमस्तक हुआ था। किंतु जनता को धोखा देकर पूज्य मातृभूमि के विभाजन का अधिकार किसी बड़े से बड़े महात्मा को भी नहीं है। इसीलिए मैंने गांधी को गोली मारी।

15 नवंबर को दी गई थी फांसी
आपको बता दें कि गांधी की हत्या के आरोप में नाथूराम गोडसे और नारायण दत्तात्रेय आप्टे को अंबाला जेल में फांसी दी गई थी। कहा जाता है कि जब उन्हें फांसी के फंदे तक ले जाया जा रहा था तो उस दौरान गोडसे अखंड भारत का नारा लगा रहे थे तो आप्ट अमर रहे कहते हुए उसके आवाज को बल दे रहे थे।

गोडसे की यह थी अंतिम इच्छा
15 नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी दी गई थी। फांसी के लिए जाते वक्त नाथूराम के एक हाथ में गीता और अखंड भारत का नक्शा था और दूसरे हाथ में भगवा ध्वज। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि फांसी का फंदा पहनाए जाने से पहले उन्होंने 'नमस्ते सदा वत्सले' का उच्चारण किया और नारे लगाए थे। गोडसे ने अपनी अंतिम इच्छा लिखकर दी थी कि उनके शरीर के कुछ हिस्से को संभाल कर रखा जाए और जब सिंधु नदी स्वतंत्र भारत में फिर से समाहित हो जाए और फिर से अखंड भारत का निर्माण हो जाए, तब उनकी अस्थियां उसमें प्रवाहित की जाए। इसमें दो-चार पीढिय़ां भी लग जाएं तो कोई बात नहीं। उनकी अंतिम इच्छा अब भी अधूरी है और शायद ही कभी पूरी हो।

ऐसे की थी बापू की हत्या
30 जनवरी 1948 की शाम 5 बजे बापू प्रार्थना सभा के लिए निकले थे। इस दौरान तनु और आभा उनके साथ थीं। उस दिन प्रार्थना में ज्यादा भीड़ थी। फौजी कपड़ों में नाथूराम गोडसे अपने साथियों करकरे और आप्टे के साथ भीड़ में घुलमिल गया। बापू आभा और तनु के कंधों पर हाथ रखे हुए थे। यहां गोडसे ने तनु और आभा को बापू के पैर छूने के बहाने एक तरफ किया, बापू के पैर छूते-छूते पिस्टल निकाल ली और दनादन बापू पर गोलियां दाग दीं।