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न अंगूठे के निशान लिए, न हस्तलिपी के नमूने, सॉल्वर, परीक्षार्थी व मीडिएटर पर नहीं हुआ अपराध साबित

आरोपियों ने किया आरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा, आरक्षक के पद पर राकेश गुर्जर का चयन कराने के लिए आशीष गुर्जर सॉल्वर के रूप में परीक्षा देने पहुंचा था

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न अंगूठे के निशान लिए, न हस्तलिपी के नमूने, सॉल्वर, परीक्षार्थी व मीडिएटर पर नहीं हुआ अपराध साबित

न अंगूठे के निशान लिए, न हस्तलिपी के नमूने, सॉल्वर, परीक्षार्थी व मीडिएटर पर नहीं हुआ अपराध साबित

ग्वालियर. विशेष सत्र न्यायालय ने व्यापमं कांड के चार आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए पुलिस की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने न आरोपियों के अंगूठें के निशान लिए। न हस्तलिपी नमूना। न किसी एक्सपर्ट से जांच करा कर रिपोर्ट पेश की। विवादित दस्तावेंजों के साक्ष्य पेश किए गए हैं। कौन किसी जगह परीक्षा देर रहा था। इस कड़ी को भी नहीं जोड़ा। इसलिए मामला संदिग्ध है। सॉल्वर, परीक्षार्थी व मीडिएटर को संदेह का लाभ मिल रहा है। इन पर व्यापमं फर्जीवाड़े का मामला साबित नहीं होता है।
व्यापमं ने 4 अक्टूबर 2015 को आरक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया। उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय रेलवे कॉलोनी में भी सेंटर था। आरक्षक के पद पर राकेश गुर्जर का चयन कराने के लिए आशीष गुर्जर सॉल्वर के रूप में परीक्षा देने पहुंचा था। वोटर आइडी व फॉर्म पर लगे फोटो में अंतर था। जब इससे पूछताछ की गई तो उसने पूरा फर्जीवाड़ा खोल दिया। पड़ाव थाना पुलिस ने आशीष गुर्जर, राकेश गुर्जर, सूरज, घनश्याम, चंद्रशेखर के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। आशीष गुर्जर सॉल्वर, सूरज, घनश्याम, चंद्रशेखर मीडिएटर के रुप के में थे। न्यायालय में चालान पेश किया। यह मामला सीबीआइ को सुपुर्द नहीं किया गया। पुलिस ने इसकी ट्रायल पूरी कराई, लेकिन पुलिस की लचर जांच के चलते चार आरोपी दोषमुक्त हो गए, जबकि राकेश गुर्जर के खिलाफ पुलिस धारा 173(8) के तहत जांच लंबित रखी है। पुलिस की लचर जांच के चलते चार आरोपी दोषमुक्त हो गए हैं।
27 केसों की ट्रायल पूरा करा रही है पुलिस
व्यापमं कांड से संबंधित बड़ी संख्या में केस सीबीआइ को सुपुर्द कर दिया था, लेकिन 27 केस पुलिस के पास रह गए थे। ये आरक्षक भर्ती सहित अन्य परीक्षाओं से जुड़े हैं। जिनकी पुलिस विचारण पूरा करा रही है।
- पुलिस ने जांच में काफी कमियां छोड़ी हैं, जिससे आरोपियों को बचने का संभावना बढ़ गई है। साक्ष्यों को इकट्ठा नहीं किए जाने की वजह से दोषमुक्त की संभावना है।
इनका कहना है
- पुलिस ने मामले की जांच ठीक से नहीं की थी और साक्ष्य नहीं जुटाए हैं। इस कारण आरोपी दोषमुक्त हुए हैं। इस मामले की अपील के लिए लिख रहे हैं।
गिरीश शर्मा, अपर लोक अभियोजक