
property registry
ग्वालियर. शहर या गांव कहीं भी किसी नए प्लॉट, मकान, कृषि भूमि आदि की रजिस्ट्री करवाने पर 12.5 फीसदी पंजीयन और मुद्रांक शुल्क लगेगा। महिलाओं के लिए भी यह दर समान है, लेकिन अगर स्वयं की संपत्ति में अपनी बेटी या पत्नी को सह स्वामी बनाना है तो सिर्फ 1100 रुपए शुल्क में बनाया जा सकता है।
हालांकि, महिला सशक्तिकरण की अवधारणा को ध्यान में रखकर शुरू की गई इस योजना में पंजीयन विभाग का सॉफ्टवेयर ही अड़ंगा साबित हो रहा है और अगर कोई संपत्ति में पत्नी या बेटी को साझा मालिकाना हक प्रदान करने के लिए दस्तावेज पंजीयन कराने का प्रयास कर रहा है तो उसमें 4.5 फीसदी ग्राम पंचायत, नगर निगम शुल्क और उपकर जुडकऱ आ रहा है। सॉफ्टवेयर की इस खामी से महिला सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई इस सरकारी योजना में लोगों की रुचि कम नजर आई। स्थिति यह है कि एक महीने से अधिक समय होने के बाद भी अभी तक 1100 रुपए में सह स्वामी बनाने के लिए एक दर्जन दस्तावेज भी पंजीकृत नहीं हो पाए।
पैसा बचाने की मंशा ज्यादा
इस विसंगति पर नहीं ध्यान
पंजीयन विभाग द्वारा 1100 रुपए में पत्नी या बेटी को सह स्वामित्व दिए जाने की योजना लागू किए जाने के बाद भी विभाग का सॉफ्टवेयर अतिरिक्त शुल्क की गणना करके कुल राशि बता रहा है। इच्छुक लोगों द्वारा पंजीकृत कराने के साथ ही दस्तावेज में 1 प्रतिशत ग्राम पंचायत शुल्क, 3 प्रतिशत नगर निगम शुल्क और .05 प्रतिशत उपकर जुडकऱ आ रहा है।
एक साल में कुल इतने दस्तावेज हुए पंजीकृत (1 अप्रैल से अक्टूबर तक)
यह है एक महीने का आंकड़ा
-अक्टूबर में 3016 दस्तावेजों के बदले में बीते वर्ष 28 करोड़ 64 लाख 57 हजार 882 रुपए शुल्क आया था, इस वर्ष अक्टूबर महीेने में 3499 दस्तावेजों के बदले 36 करोड़ 6 लाख 91 हजार 345 रुपए खजाने में पहुंचे हैं।
बना सकते हैं संयुक्त स्वामी
कोई भी व्यक्ति पत्नी या पुत्री को संपत्ति में सह स्वामी बनाए तो 1100 रुपए शुल्क है। इसको लेकर अगर आम जन को कोई असमंजस है तो वह पंजीयन कार्यालय संपर्क करके डाउट क्लीयर कर सकता है। जहां तक दस्तावेज पंजीयन की बात है तो गाइडलाइन में 20 फीसदी कमी होने के बाद से राजस्व आय में 8 फीसदी वृद्धि हुई है।
डॉ दिनेश कुमार गौतम, जिला पंजीयक
सिस्टम कर रहा है गलत गणना
एक प्रतिशत ग्राम पंचायत में और 3 प्रतिशत नगर निगम में .05 प्रतिशत उपकर लग रहा है, ऐसे दस्तावेज में 1100 रुपए के अलावा 4.5 प्रतिशत संपदा शुल्क की सॉफ्टवेयर गलत तरीके से गणना कर रहा है, इससे योजना का मूलभूत उद्देश्य सफल नही हो पा रहा है। सिस्टम में सुधार होने पर ही इसका सही लाभ मिल पाएगा।
राघवेन्द्र शर्मा, पंजीयन मामलों के अभिभाषक
Published on:
24 Nov 2019 01:08 pm
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