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न बैठने की, न पानी की व्यवस्था, कुटुंब न्यायालय में आने वाले पक्षकार बेहाल

कुटुंब न्यायालय में लगातार केसों की संख्या बढ़ रही है। इस कारण इस न्यायालय में हर दिन लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन यहां आने वाले पक्षकार व अधिवक्ताओं...

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न बैठने की, न पानी की व्यवस्था, कुटुंब न्यायालय में आने वाले पक्षकार बेहाल

ग्वालियर. कुटुंब न्यायालय में लगातार केसों की संख्या बढ़ रही है। इस कारण इस न्यायालय में हर दिन लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन यहां आने वाले पक्षकार व अधिवक्ताओं के लिए न बैठने की व्यवस्था अच्छी है। न पीने का पानी। जब तक न्यायालय में नंबर आता है, उन्हें बाहर ही खड़ा रहना पड़ता है या फिर परिसर में गाडिय़ों पर बैठकर समय बिताना पड़ता है। व्यवस्थाएं नहीं होने से अधिवक्ता व पक्षकार परेशान हैं। गांधी रोड के बंगले में कुटुंब न्यायालय बनाया गया है। ग्वालियर में पति-पत्नी के बीच होने वाले झगड़ों की वजह से तीन न्यायालय संचालित होने लगे हैं। हर दिन बड़ी संख्या में केस लिस्ट हो रहे हैं। एक केस में करीब सात से आठ लोग उपस्थिति होते हैं, जिसकी वजह से भीड़ रहती है। पोर्च में खड़े नहीं हो पाते हैं। इसके अलावा बार रूम में भी जगह नहीं है। इस वजह से पेड़ों के नीचे खड़े रहना पड़ता है। इसके अलावा पीने का पानी नहीं होने से बोतलें खरीदना पड़ रही हैं।


केसों की स्थिति
कुल फाइल्ड केस 6704
सुनवाई में नहीं आए 466
निराकृत केस 957

मीडिएशन हॉल की हालत खराब
- पति-पत्नी के बीच काउंसिङ्क्षलग के लिए अलग से जगह दी गई है। इस हॉल में भी बैठक व्यवस्था ठीक नहीं है। काउंसिङ्क्षलग के दौरान इसमें भीड़ रहती हैं। पति-पत्नी के बीच होने वाली काउंसिङ्क्षलग में दिक्कत आती है। क्योंकि दोनों पक्ष दूसरों के सामने बात करने से हिचकिचाते हैं।
- अधिवक्ताओं का बार रूम भी काफी छोटा है। इस कारण यह पूरा भरा रहता है।


इनका कहना है
बार रूम काफी छोटा है। इस कारण वहां बैठने की जगह नहीं है। जब तक केस नहीं आता है, तब तक खड़ा रहना पड़ता है। इससे दिक्कत होती है। पक्षकारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पानी भी खरीदकर पीना पड़ता है। टायलेट की भी व्यवस्था नहीं है।
घनश्याम ङ्क्षसह सिसौदिया, अधिवक्ता


बार रूम में व्यवस्थाओं में सुधार किया है। कुटुंब न्यायालय में होने वाली समस्याओं के बारे में अधिवक्ताओं ने बताया है। उनमें सुधार के लिए न्यायाधीशों से चर्चा की जाएगी। ताकि सुधार हो सके।
महेश गोयल, सचिव हाईकोर्ट बार एसोसिएशन