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अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी समझ सकेंगे टैक्स के नियम : कम हुए सेक्शन, बढ़ा तालमेल

ग्वालियर के टैक्स बार एसोसिएशन ने आयकर की जटिल दुनिया को सरल बनाने के लिए शुक्रवार को मास्टर क्लास का आयोजन किया। 2026 के इस दौर में जब टैक्स के नियम बदल रहे हैं, तब ग्वालियर के वकीलों और विशेषज्ञों ने आयकर अधिनियम 2025 की परतें खोलीं। इस स्टडी सर्किल बैठक के मुख्य अतिथि और […]

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टैक्स बार ऐसोसिएशन ने किया आयकर अधिनियम 2025 पर कार्यक्रम

टैक्स बार ऐसोसिएशन ने किया आयकर अधिनियम 2025 पर कार्यक्रम

ग्वालियर के टैक्स बार एसोसिएशन ने आयकर की जटिल दुनिया को सरल बनाने के लिए शुक्रवार को मास्टर क्लास का आयोजन किया। 2026 के इस दौर में जब टैक्स के नियम बदल रहे हैं, तब ग्वालियर के वकीलों और विशेषज्ञों ने आयकर अधिनियम 2025 की परतें खोलीं। इस स्टडी सर्किल बैठक के मुख्य अतिथि और संयुक्त आयुक्त (आयकर) राकेश कुमार ने एक बड़ी खुशखबरी साझा करते हुए बताया कि नया अधिनियम अब केवल विशेषज्ञों की जागीर नहीं रहेगा। सरकार इसे क्षेत्रीय भाषाओं में भी तैयार कर रही है ताकि एक आम करदाता भी अपनी मातृभाषा में कायदे-कानून समझ सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि फालतू के सेक्शनों की छंटनी कर दी गई है और पूरे ड्राफ्ट को क्रिस्प और क्लियर बनाया गया है। कार्यक्रम की शुरुआत अध्यक्ष अनिल दुबे के स्वागत भाषण से हुई, जबकि मंच संचालन डॉ.अमित बंसल ने किया। आभार प्रदर्शन संदीप गुप्ता ने व्यक्त किया। इस मौके पर अनिल अग्रवाल, शरद वाकलीवाल और राम निवास शर्मा मौजूद रहे।

करदाता और अधिवक्ता इसे सहजता से समझ सकेंगे
विशिष्ट अतिथि दिवाकर तिवारी (आयकर अधिकारी) ने वकीलों की शंकाओं को दूर करते हुए साफ किया कि नए और पुराने अधिनियम में कोई जमीनी भूचाल नहीं आया है। बुनियादी ढांचे को वही रखा गया है, बस प्रस्तुतिकरण ऐसा कर दिया गया है कि करदाता और अधिवक्ता इसे सहजता से समझ सकें। वहीं, मुख्य वक्ता अधिवक्ता आलोक ढींगरा ने अपने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए नए प्रावधानों का एक्स-रे कर दिया। उन्होंने एक-एक कर उन बदलावों को समझाया जो भविष्य में टैक्स प्रैक्टिस की दिशा बदलने वाले हैं।