बिजली के खराब मीटर बदलने का काम बेहद धीमी गति से होने के कारण शहर में17 हजार उपभोक्ताओं को बिजली अफसरों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। इन उपभोक्ताओं को आकलित खपत के बिल दिए जा रहे हैं, जिससे लोग परेशान हैं और अफसरों के चक्कर लगा
ग्वालियर. बिजली के खराब मीटर बदलने का काम बेहद धीमी गति से होने के कारण शहर में17 हजार उपभोक्ताओं को बिजली अफसरों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। इन उपभोक्ताओं को आकलित खपत के बिल दिए जा रहे हैं, जिससे लोग परेशान हैं और अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं। अब बिजली अफसर जुलाई तक सभी मीटर बदलने की बात कह रहे हैं, जिससे इन उपभोक्ताओं को दो महीने और इंतजार करना पड़ेगा।
विधानसभा चुनाव से पहले शहरी क्षेत्र में 27 हजार उपभोक्ताओं ने मीटर खराब होने की शिकायत की थी। यह मीटर जल गए हैं या सही रीडिंग दर्ज नहीं कर रहे हैं। यह उपभोक्ता अक्टूबर से लगातार अलग-अलग जोन ऑफिस में शिकायत दर्ज करा रहे हैं। विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार ने मीटर संबंधी रिपोर्ट मंागी थी, जिस पर सिटी सर्किल कार्यालय से एमडी ऑफिस भोपाल भेजी गई रिपोर्ट में 27 हजार मीटर बदले जाने की जरूरत बताई गई थी। जनवरी में मीटर बदलने की हरी झंडी भी मिल गई, लेकिन बिजली अफसरों द्वारा मीटर बदलने में लेटलतीफी की गई।
आकलित खपत की आड़ में अवैध वसूली
शहर में आकलित खपत लगाकर उपभोक्ताओं को मनमाना बिल थमाया जा रहा है। उपभोक्ता जोन ऑफिस में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराते हैं, इन्हें बिल में सुधार के लिए बिजली अफसरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके बाद बिजली अफसर उपभोक्ताओं के घर लोड चेक करने की बात कहकर डराते हैं। कई उपभोक्ताओं के घर लोड चेक कर बिजली कंपनी के गणित में फंसा देते हैं। इसके बाद फिर उपभोक्ताओं के बिल संशोधित करने के नाम पर अवैध वसूली की जाती है। यही कारण है कि अधिकारी मीटर बदलवाने में लेटलतीफी करते हैं। मीटर बदलने का काम तेज गति से किया जाता तो एक महीने में सारे मीटर बदल जाते।
जुलाई तक बदल जाएंगे
शहर में 27 हजार मीटर बदलने थे, जिनमें अब तक 10 हजार बदले जा चुके हैं। 17 हजार बदलना शेष रहा गया है। ये मीटर जुलाई तक बदल दिए जाएंगे।
नितिन मांगलिक, महाप्रबंधक, शहरी वृत्त, मक्षेविविकंलि