
teachers (Photo Source - Patrika)
MP News: ग्वालियर बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले शिक्षा विभाग ने वर्षों से चली आ रही अटैचमेंट प्रथा पर बड़ी कार्रवाई की है। जिले में अलग-अलग कार्यालयों और मनपसंद स्कूलों में अटैच करीब 150 शिक्षकों को परीक्षाओं के लिए कार्यमुक्त कर दिया है। अब ये सभी शिक्षक अपने मूल पद पर स्कूल में उपस्थिति दर्ज कराएंगे, तभी फरवरी का वेतन मिलेगा। प्रदेशभर के स्कूलों में एक फरवरी से एस्मा लागू किया जा रहा है। इसके पहले माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं, अब शिक्षक वहीं पढ़ाएंगे जहां उनकी पोस्टिंग है।
हाल ही में डीईओ द्वारा किए गए स्कूलों के निरीक्षण के दौरान चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। कई स्कूलों में शिक्षकों ने खुद बताया कि अन्य शिक्षक दूसरी जगह अटैच हैं। ऐसे में बच्चों को पढ़ाए कौन । बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के समय यह स्थिति गंभीर थी। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग को आखिरकार सख्त कदम उठाना पड़ा।
माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 7 फरवरी से शुरू हो रही हैं। जिले में करीब 50 हजार और प्रदेशभर में करीब 16 लाख छात्र परीक्षा में शामिल होंगे। इसे देखते हुए शासन ने एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस एक्ट (एस्मा) लागू कर दिया है, जो 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान शिक्षक अवकाश नहीं ले सकेंगे, आंदोलन, धरना प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे।
जिले में करीब 150 शिक्षक ऐसे हैं, जो मूल पदस्थापना छोड़कर सालों से मनचाही जगहों जैसे संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और कलेक्ट्रेट पर अटैच थे। इनमें से अधिकांश को संकुल प्राचार्यों ने डीईओ कार्यालय की सहमति से शैक्षणिक व्यवस्था के नाम पर संलग्न कराया था। हकीकत यह है कि इन शिक्षकों की मूल पोस्टिंग घर से दूर थी, इसलिए उन्होंने अटैचमेंट का सहारा लिया। इतना ही नहीं करीब 50 शिक्षक मतदाता सूवी पुनरीक्षण (बीएलओ) के नाम पर दूसरे शासकीय कार्यालयों में जमे हुए हैं।
शासन के आदेश के अनुसार 31 जनवरी तक सभी शिक्षकों की ई-सेवा पुस्तिका अपडेट होगी। परीक्षा को देखते हुए सभी अटैचमेंट स्वतः समाप्त माने जाएंगे, शिक्षक अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूल में उपस्थिति देंगे, उसके बाद ही फरवरी का वेतन जारी होगा। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी शिक्षक का अन्यत्र अटैचमेंट या शैक्षणिक व्यवस्था के मूल नाम पर वेतन आहरित होता है या कोई अप्रिय स्थिति बनती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं शिक्षक की होगी।
कलेक्टर के निर्देश पर जो भी शिक्षक अटैच थे, उन्हें मूल विभाग में भेज दिया है। बीएलओ के कार्य में लगे शिक्षकों को कहा गया है कि यह जिस स्कूल में हैं यहां बच्चों को जरूर पढ़ाएं और परीक्षा में ड्यूटी जरूर करें। वैसे डीईओ कार्यालय में कोई शिक्षक अटैच नहीं है। अटैच शिक्षक अपने मूल स्कूल में उपस्थिति वेंगे तभी उनका फरवरी में वेतन जारी होगा।- हरिओम चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी ग्वालियर
बोर्ड परीक्षा के लिए प्रदेशभर में विभिन्न कार्यालयों में अटैच शिक्षकों को वापस मूल विभाग में भेजना काफी जरूरी था। क्योंकि पहली प्राथमिकता शिक्षकों की पढ़ाई है। ग्वालियर में भी करीब 150 शिक्षक कलेक्ट्रेट, संभागीय व डीइओ कार्यालय में अटैच हैं, इन्हें मूल विभाग भेजना अच्छण निर्णय है।- अरविंद दीक्षित, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रांतीय शिक्षक संघ
Published on:
26 Jan 2026 12:59 pm
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