
नसबंदी कराने के बाद भी हो गए बच्चे, अब खौंफ ऐसा की नसंबदी से बनाई दूरी
भिण्ड. नसबंदी फेल होने तथा ऑपरेशन के दौरान मौतों का आंकड़ा बढ़ जाने से परिवार नियोजन में लोगों को रुचि पिछले सालों की तुलना में तेजी से घट रही है। तीन साल में सिर्फ 13 हजार महिलाओं ने ही नसबंदी कराई है, जबकि चार साल पहले एक ही साल में इससे ज्यादा महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन हुए थे। विभाग की ओर से टारगेट देना बंद कर दिए जाने से अधिकारियों ने भी परिवार नियोजन में दिलचस्पी लेना बंद कर दिया है।
अंतिम बार वर्ष 2016-17 में भिण्ड जिले को 13 हजार नसबंदी कराने का टारगेट दिया गया था। इस साल 5431 महिलाओं की नसबंदी कराई गई थी। इसके बाद विभाग ने टारगेट देना बंद कर दिया तो अधिकारियों ने भी जनसंख्या को रोकने के लिए परिवार नियोजन से मुंह फे र लिया है। वर्ष 2017-18 में यह संख्या घटकर 4710 पर आ गई। वर्ष 2018-19 में 31 जनवरी तक 3261 नसंबदी हो पाई हैं। यद्धपि अभी करीब दो माह का समय शेष है, लेकिन अधिकारी आंकड़ा इसके ऊपर पहुंचने से इंकार कर रहे हंै। नसबंदी ऑपरेशनों के फेल होने से महिलाओं में परिवार नियोजन के प्रति रुचि घट रही है। उक्त तीन सालों में आधा सैकड़ा के अधिक नसबंदी फेल होने के मामले सामने आए है। अनचाहे बच्चे के पालन पोषण के लिए पालकों को भटकना पड़ रहा है। ऐसे परिवारों को शासन की ओर से कोई मदद देने का प्रावधान नहीं है। नसबंदी कराने से पहले महिला से एक फार्म पर हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं, जिसमें लिखा होता है कि नसबंदी फेल हो गई तो क्लेम नहीं किया जाएगा। उक्त तीन सालों में ऑपरेशन के दौरान ही विभिन्न कारणों से 5 महिलाओंं की मौत हो जाने से भी लोगों की नसबंदी में रुचि घट गई है।
महिला एवं पुरुष नसबंदी के आंकड़े
वर्ष महिला पुरुष
2016-17 5357 74
2017-18 4710 23
2018-19 3261 07
पुरुष नसबंदी आसान और सुरक्षित फिर भी आंक ड़े निराशाजनक
डाक्टर्स की माने तो पुरुष नसबंदी परिवार नियोजन का आसान और सुरक्षित उपाय होने के बाद भी आंकड़े निराशजनक हैं। प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 2 हजार कर दिए जाने के बाद भी पुरुष वर्ग रुचि नहीं ले रहा। तीन साल में सिर्फ 104 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई है। मौजूदा वर्ष में तो अभी तक सिर्फ 7 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई है। सबसे अधिक 74 पुरुषों ने वर्ष 2016-17 में नसबंदी कराई थी।
पुरुषों को नसबंदी के लिए तैयार करना कठिन
पहले के सालों में जिला स्तर पर टारगेट दिया जाता था तो लोग 50 साल से ऊपर की महिला-पुरुषों की नसबंदी करा देते थे, लेकिन अब लोग स्वयं ही आ रहे हैं। 2 फीसदी तक नसबंदी फेल होने की संभावना रहती है। परिवार नियोजन के लिए पुरुषों को तैयार करना कठिन होता है।
डॉ. जेपीएस कुशवाह, सीएमएचओ भिण्ड
पांच साल पहले सीएचसी के शिविर में नसबंदी कराई थी। दो साल पहले एक बेटे का जन्म हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है अनचाहे बच्चे का पालन पोषण कर सकें। क्लेम करने के बाद भी शासन से एक पैसे की मदद नहीं मिली।
शांति देवी, पीडि़त महिला मेहगांव
Published on:
02 Feb 2019 03:22 pm
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