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लोक कलाओं में होते हैं भारतीय संस्कृति के दर्शन

पद्मभूषण कथक नृत्याचार्य पं. बिरजू महाराज ने कहा...

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लोक कलाओं में होते हैं भारतीय संस्कृति के दर्शन

लोक कलाओं में होते हैं भारतीय संस्कृति के दर्शन

ग्वालियर.

लोक नृत्य एवं लोक कलाएं भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। परम्परागत लोक कलाओं के संवर्धन के लिए लोक कलाकारों को प्रोत्साहन दिए जाने की अत्यंत आवश्यकता है। लोक कलाओं में भारतीय संस्कृति के दर्शन होते हैं। यह बात मुख्य अतिथि के रूप में पद्मभूषण कथक नृत्याचार्य पं. बिरजू महाराज ने राष्ट्रीय व्याख्यान माला में कही। यह ऑनलाइन कार्यक्रम राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की ओर से 'भारतीय संस्कृति की संवाहक: हमारी लोक कलाएंÓ विषय पर हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में कथक नृत्यांगना प्रो. पूर्णिमा पाण्डे उपस्थित रहीं। अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पं. साहित्य कुमार नाहर ने की।

लोक संस्कृति के कारण वैश्विक स्तर पर हमारी पहचान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. पूर्णिमा ने कहा कि लोक कलाओं की परम्पराओं का भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान है। लोक कलाओं के कारण ही वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान है एवं इसी आधार पर हमारी संस्कृति विश्व के किसी भी अन्य देश की तुलना में श्रेष्ठ है। समय एवं परिस्थितियों में परिवर्तन होने पर भी भारतीय लोक कलाएं अपना मूल स्वरूप यथावत बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय नृत्यों का मूल लोक नृत्यों में समाहित हैं। संचालन डॉ. अंजना झा एवं मनीष करवड़े ने किया। कार्यक्रम संयोजन प्रो. रंजना टोणपे एवं सह संयोजन डॉ. सुनील पावगी ने किया। आभार कुलसचिव डॉ. कृाष्णकान्त शर्मा ने व्यक्त किया।

सभी विधाएं एक दूसरे से परस्पर संबंधित
वर्तमान में लोक कलाओं के प्रस्तुतिकरण में वेशभूषा एवं श्रृंगार का महत्व बढ़ा है। लोक गायन, लोक नृत्य, लोक वाद्य, लोक नाट्य, लोक कला आदि सभी विधाएं एक दूसरे से परस्पर संबंधित हैं। लोक कलाएं मात्र मनोरंजन का साधन न होकर संदेशात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम हैं। लोक कलाओं एवं संस्कृति की अमूल्य धरोहर को सूक्ष्मता से समझना एवं इसका संवर्धन करना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है।

ताल झपताल में ठाट, उठान, आमद की प्रस्तुति
कथक विभाग की ओर से साधना महोत्सव का आयोजन हुआ। प्रथम प्रस्तुति छात्रा आयुशी सरवरिया ने गुरु वंदना से प्रारम्भ कर ताल पक्ष में ताल झपताल में ठाट, उठान, आमद, तोड़े, तिहाई की प्रस्तुति दी। दूसरी प्रस्तुति ख़ुशबू यादव की ताल झपताल में ठाट, उठान, आमद, तोड़े, तिहाई की रही। यह आयोजन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजना झा के मार्गदर्शन में हुआ।