
रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रकाल का साया,राखी बांधते समय इनका रखें विशेष ध्यान,बदल जाएगी भाई की किस्मत
ग्वालियर। इस बार श्रावण मास की पूर्णिमा पर 26 अगस्त को राखी का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन बहन भाई की लंबी उम्र की कामन एवं सुख समृद्धि के लिए राखी बांधती है। पंडित सतीश सोनी ने बताया कि इस साल रक्षाबंधन पर भद्रकाल का साया नहीं रहेगा। लेकिन राखी के दिन पंचक रहेंगे। पंचक 25 अगस्त से शुरू होकर 30 अगस्त तक चलेंगे।उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन पर रविवार दोपहर 12.35 बजे तक घनिष्ठ नक्षत्र रहेगा। इसके बाद शतभिषा नक्षत्र प्रारंभ होगा। ये दोनों ही नक्षत्र पंचक कारक है और इस दिन 11 घंटे तक राखी बांधने का मुहूर्त रहेगा।
यह है मुहूर्त
पंडित राधेश्याम शर्मा ने बताया कि रक्षाबंधन पर शाम 4.30 से शाम 6 बजे तक राहु काल रहेगा। इस दौरान राहु काल में राखी नहीं बांधना चाहिए। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5.29 से शाम 5.12 बजे तक है। पूर्णिमा तिथि 25 अगस्त को दोपहर 3.16 बजे शुरू होकर 26 अगस्त को शाम 5.25 बजे तक रहेगी।
पंचक में बांध सकते हैं राखी
पंडित सतीश सोनी ने बताया कि घनिष्ठा से रेवती तक पांच नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है। जो कि पांच दिनों तक चलता है। पंचक को लेकर भ्रांति यह है कि इसमें कोई भी काम नहीं करना चाहिए,जबकि सत्यता यह है कि पंचक में अशुभ काम नहीं करना चाहिए,क्योंकि उसकी पांच बार पुनरावृत्ति होती है। पंचक में शुभ काम में कोई बाधा नहीं होती। इसलिए राखी बांधने में पंचक बाधक नहीं होंगे।
त्योहार
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5.59 से शाम 5.12 बजे तक है। इसके बाद राहुकाल लग जाएगा। इस दौरान बहन को भाई की कलाई पर राखीं नहीं बांधनी चाहिए।
रक्षाबंधन पर विशेष मुहूर्त
लाभ की बेला सुबह 9 से 10.43 बजे तक।
अमृत बेला सुबह 10.43 से दोपहर 12.19 बजे तक।
शुभ की बेला दोपहर 1.55 से शाम 3.31 बजे तक।
26 को खत्म होगा सावन मास
रक्षाबंधन के साथ ही श्रावण मास (सावन मास) जो कि 26 को खत्म हो जाएगा। रक्षा बंधन पर करीब 11.26 घंटे तक राखी बांधने का मुहूर्त रहेगा। राखी बांधने का मुहूर्त सुबह 5.59 बजे से शाम 5.12 बजे तक रहेगा। इसी दौरान ही बहन को भाई की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए।
राखी बांधते समय रखें यह ध्यान
चावल के आटे से चौक बनाएं और मिट्टी के मटके की स्थापना करें।
मटके का पूजन करें। उस पर तिलक लगाएं,फूल चढ़ाएं और फिर रक्षा सूत्र बांधकर मिठाई चढ़ाएं।
इसके बाद भाई को लकड़ी के पीढ़े पर बैठाएं। ध्यान रहे कि भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर ही होना चाहिए और बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर।
भाई की आरती उतारें और उसे रोली का टीका लगाकर अक्षत लगाएं।
भाई के दाईं कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधें।
राखी बांधते समय येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबल तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल मंत्र का जाप करें। इसके बाद भाई को मिठाई खिलाएं।
Updated on:
24 Aug 2018 04:55 pm
Published on:
24 Aug 2018 04:48 pm
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