
Silly conference
ग्वालियर. ग्वालियर विकास समिति की ओर से गुरुवार को महाराज बाड़े पर 40वां मूर्ख सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें शहर एवं बाहर के कवियों ने शहरवासियों को खूब गुदगुदाया। इस आयोजन में मप्र के साथ ही राजस्थान, उप्र से भी कवियों ने शिरकत की। एक के बाद एक कवि ने काव्य पाठकर शहरवासियों को देर रात तक जोड़े रखा। संस्था की ओर से महामूर्ख का खिताब विधायक प्रवीण पाठक कोदिया गया। संयोजक प्रेम बरौनिया ने कार्यक्रम का संचालन किया।
मूर्ख सम्मेलन में सभी कवियों का सम्मान कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, संस्था के प्रभारी अध्यक्ष धीरज शर्मा, डॉ राकेश रायजादा, प्रभारी महासचिव डॉ. सीपी लाडकानी ने शॉल-श्रीफ ल एवं मोमेंटो भेंटकर किया। इस अवसर पर वीरेंद्र शर्मा, राकेश सिंह कुशवाह, संतोष सिंह मोहन वाधवानी, अशोक प्रेमी, डॉ. प्रदीप कश्यप, डॉ उदय श्रीवास्तव खेमराज आदि मौजूद थे।
ये पढ़ीं रचनाएं
महंगे रंग, महंगी पिचकारी, महंगा हुआ गुलाल,
गुझिये में भी भरा नहीं है पहले जैसा माल।
गोरी की भी रही नहीं नागिन जैसी चाल,
महंगाई में चिपक गए चिकने चुपड़े गाल।।
यश धुरंधर, भोपाल
है मोहब्बत कीमती दो भाग में न बांटिए,
नफरतों से न्याय की दीवार को न पाटिए।
दर्द की शहनाइयों से आंसुओं की धार है,
जिंदगी छोटी है इसको मुस्करा के काटिए।।
राजू चौरसिया, इंदौर
सबूतों से चले थे जूतों तक आ पहुंचे,
ये मेरे देश के नेता ताबूतों तक जा पहुंचे।
पंकज जोशी, देवास
धरा दुखी है आज हमारी बाबाओं की करतूतों से
संभल के रहना अपने घरों जिंदा ऐसे भूतों से
बाबूलाल डिगिया, भरतपुर
होली के दिन मित्रों ने अजीब रंग जमाया,
हमें बहला फुसलाकर घर से बाहर बुलाया।
बोले हम आपको रंगारंग चीप बनाएंगे,
ढैंचू पर बैठाकर जन्नत की सैर कराएंगे।।
धर्मपाल मधुकर, कवि
कि जुमले फेंककर हम भी कहीं सरकार हो जाएं,
गधे पे बैठकर हम भी नदी के पार हो जाएं।
महीने साथ भागेंगे वहां से फिर न भागेंगे,
हमारा तन तो कहता है कि चौकीदार हो जाएं।
अमित चितवन, ग्वालियर
Published on:
23 Mar 2019 08:05 pm
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