राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत सोमवार को रेलवे स्टेशन पर उस समय नाराज हो गए जब उनकी उनकी अगवानी के लिए पहुंचे लोगों ने वहां जय श्रीराम
ग्वालियर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत सोमवार को रेलवे स्टेशन पर उस समय नाराज हो गए जब उनकी उनकी अगवानी के लिए पहुंचे लोगों ने वहां जय श्रीराम के नारे लगाने शुरू कर दिए। नारे लगते ही भागवत पलटे और कहा कि कोई नारे नहीं लगाएगा और आगे निकल गए। इस बीच मीडिया ने उनसे सवाल भी किए लेकिन उन्होंने कोई बात नहीं की।
भागवत यहां संघ के प्रांत प्रचारक यशवंत इंदापुरकर की बेटी के विवाह में शामिल होने आए थे। विवाह में भागवत के अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान , हरियाणाके राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी समेत प्रदेश सरकार के कई मंत्री शामिल हुए। संघ के प्रांत प्रचारक यशवंतराव इंदापुरकर के यहां आयोजित विवाह समारोह में शामिल होने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यहां आए। वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत और हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी सहित कई वरिष्ठ नेता पहुंचे और वर-वधु को आशीर्वाद दिया।
सिंतबर 2010 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने पर अफ़सोस करने का सवाल ही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि राम मंदिर आंदोलन का संघ का पूरा समर्थन जारी रहेगा। चंडीगढ़ में प्रेस में मोहन भागवत ने कहा कि बाबरी ढाँचा गिराया जाना कोई साज़िश नहीं थी बल्कि कारसेवकों की सहज प्रतिक्रिया थी, जिनकी भावनाओं पर चोट पहुँचाई गई थी। मोहन भागवत ने कहा था कि जो भी हुआ वह राम मंदिर निर्माण आंदोलन से जुड़ा हुआ था। संघ प्रमुख ने कहा कि अफ़सोस जिनको करना चाहिए, वे करें। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को इस पर कोई अफसोस नहीं।
मोहन भागवत जीवन परिचय
मोहनराव मधुकरराव भागवत का जन्म महाराष्ट्र के चन्द्रपुर नामक एक छोटे से नगर में 11 सितम्बर 1950 को हुआ था। वे संघ कार्यकर्ताओं के परिवार से हैं। उनके पिता मधुकरराव भागवत चन्द्रपुर क्षेत्र के प्रमुख थे जिन्होंने गुजरात के प्रान्त प्रचारक के रूप में कार्य किया था। मधुकरराव ने ही लाल कृष्ण आडवाणी का संघ से परिचय कराया था। उनके एक भाई संघ की चन्द्रपुर नगर इकाई के प्रमुख हैं। मोहन भागवत कुल तीन भाई और एक बहन चारो में सबसे बड़े हैं।
मोहन भागवत ने चन्द्रपुर के लोकमान्य तिलक विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा और जनता कॉलेज चन्द्रपुर से बीएससी प्रथम वर्ष की शिक्षा पूर्ण की। उन्होंने पंजाबराव कृषि विद्यापीठ, अकोला से पशु चिकित्सा और पशुपालन में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1975 के अन्त में, जब देश तत्कालीन प्रधानमन्त्री इंदिरा गान्धी द्वारा लगाए गए आपातकाल से जूझ रहा था, उसी समय वे पशु चिकित्सा में अपना स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम अधूरा छोड़कर संघ के पूर्णकालिक स्वयंसेवक बन गये।
आपातकाल के दौरान भूमिगत रूप से कार्य करने के बाद 1977 में भागवत महाराष्ट्र में अकोला के प्रचारक बने और संगठन में आगे बढ़ते हुए नागपुर और विदर्भ क्षेत्र के प्रचारक भी रहे। 1991 में वे संघ के स्वयंसेवकों के शारीरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अखिल भारतीय प्रमुख बने और उन्होंने 1999 तक इस दायित्व का निर्वहन किया। उसी वर्ष उन्हें, एक वर्ष के लिये, पूरे देश में पूर्णकालिक रूप से कार्य कर रहे संघ के सभी प्रचारकों का प्रमुख बनाया गया। वर्ष 2000 में, जब राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) और हो०वे० शेषाद्री ने स्वास्थ्य सम्बन्धी कारणों से क्रमशः संघ प्रमुख और सरकार्यवाह का दायित्व छोडने का निश्चय किया, तब के एस सुदर्शन को संघ का नया प्रमुख चुना गया और मोहन भागवत तीन वर्षों के लिये संघ के सरकार्यवाह चुने गये। 21 मार्च 2009 को मोहन भागवत संघ के सरसंघचालक मनोनीत हुए। वे अविवाहित हैं तथा उन्होंने भारत और विदेशों में व्यापक भ्रमण किया है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख चुने जाने वाले सबसे कम आयु के व्यक्तियों में से एक हैं। उन्हें एक स्पष्टवादी, व्यावहारिक और दलगत राजनीति से संघ को दूर रखने के एक स्पष्ट दृष्टिकोण के लिये जाना जाता है।
मोहनराव मधुकरराव भागवत का जन्म महाराष्ट्र के चन्द्रपुर नामक एक छोटे से नगर में 11 सितम्बर 1950 को हुआ था। वे संघ कार्यकर्ताओं के परिवार से हैं।