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सरोद के उस्ताद अमजद अली खां ने कहा, सरकार के लिए कभी नहीं बजाएंगे सरोद, क्या है इसकी वजह

दुनियाभर में सरोद के सम्मानित कलाकार उस्ताद अमजद अली खान अपनी ही जन्म भूमि मध्यप्रदेश में उपेक्षा से आहत हैं।

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ग्वालियर। दुनियाभर में सरोद के सम्मानित कलाकार उस्ताद अमजद अली खान अपनी ही जन्म भूमि मध्यप्रदेश में उपेक्षा से आहत हैं। उन्होंने प्रदेश के संस्कृति विभाग पर निरादर का आरोप लगाते हुए कहा है कि अब वे कभी भी मप्र सरकार के लिए सरोद नहीं बजाएंगे। वे अब प्रदेश सरकार का कोई न्योता भी स्वीकार नहीं करेंगे। वे ग्वालियर में होने जा रहे तानसेन समारोह में नहीं बुलाए जाने से नाराज हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी संदेश भेजकर नाराजगी जाहिर की है।

पिछली बार भी देर से जुड़ा था नाम
वर्ष 2016 के तानसेन समारोह के कलाकारों की पहली सूची में उस्ताद अमजद अली खान का नाम नहीं था। इस पर विवाद पैदा होने के बाद सरकार को उनका नाम शामिल करना पड़ा और लंबे अंतराल के बाद तानसेन समारोह में उनकी प्रस्तुति हुई। तानसेन समारोह का मुख्य कार्यक्रम 22 से 26 दिसंबर तक होना है। २१ दिसंबर को पूर्व रंग कार्यक्रम गमक का आयोजन होगा, जिसमें भजन गायक अनूप जलोटा की प्रस्तुति होनी है।

प्रतिष्ठित समारोह में बड़े नाम क्यों नहीं?
उस्ताद अमजद अली खान ने पत्रिका से कहा कि प्रदेश का संस्कृति विभाग लगातार मेरा और मेरे परिवार का अनादर कर रहा है। यह समारोह संगीत सम्राट तानसेन को श्रद्धांजलि है, लेकिन यह कैसी श्रद्धांजलि कि इसमें बुलाए जा रहे कलाकारों को कोई जानता तक नहीं। इतने प्रतिष्ठित में बड़े कलाकारों को क्यों नहीं बुलाया जाता?

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संगीत साधना का फ्लो न बिगड़े इसलिए बंद कर दिया एक हजार बच्चों का स्कूल

संगीत मेरे तन और मन में बसता है। हमारी पांच पीढि़यां संगीत को आगे बढ़ाने के लिए काम करती चली आ रही हैं। मैंने १० साल की उम्र में संगीत के क्षेत्र में कदम रखा। बीच में मैंने स्कूल खोला, जो १००० बच्चों का था। वह स्कूल २५ साल तक चला और जब स्कूल के कारण मैं संगीत में कम समय देने लग गया, तो मैंने स्कूल ही बंद कर दिया। इसके बाद मैं इस क्षेत्र में पूरा समय दे पाया। यह कहना है देश के प्रख्यात ख्याल गायक सुरेश गंधर्व का, जो तानसेन समारोह में २४ दिसंबर के शाम की सभा में प्रस्तुति देने ग्वालियर आ रहे हैं।