एमपी के ग्वालियर में आसमान से आफत बरस रही है। यहां के कई गांवों में लोहे के कई किलो वजनी गोले गिर रहे हैं जिससे लोग दहशत में हैं। इन रहस्यमयी गोलों से खेतों में गहरे गड्ढे हो रहे हैं। बम जैसे गोला गिरने से जहां गांववालों में डर है वहीं कुछ जगहों पर बच्चे इनसे खेल रहे हैं। विशेषज्ञ इन्हें सैटेलाइट का मलबा बता रहे हैं। इसे सेटेलाइट के हाइड्राज‍िन सेल का पार्ट बताया जा रहा है।
एमपी के ग्वालियर में आसमान से आफत बरस रही है। यहां के कई गांवों में लोहे के कई किलो वजनी गोले गिर रहे हैं जिससे लोग दहशत में हैं। इन रहस्यमयी गोलों से खेतों में गहरे गड्ढे हो रहे हैं। बम जैसे गोला गिरने से जहां गांववालों में डर है वहीं कुछ जगहों पर बच्चे इनसे खेल रहे हैं। विशेषज्ञ इन्हें सैटेलाइट का मलबा बता रहे हैं। इसे सेटेलाइट के हाइड्राजिन सेल का पार्ट बताया जा रहा है।
भितरवार इलाके में कई जगहों पर आसमान से ये रहस्यमयी गोले खेतों में गिरे हैं। यहां के करीब आधा दर्जन गांवों में लोहे के गोले गिरे जिससे दहशत फैल गई। करीब 10 किमी के दायरे में 15 मिनट के अंतराल में छह गांवों में गोले गिरे।
गांववालों ने इन्हें बम समझा। सूचना मिलते ही ग्वालियर से बम डिस्पोजल स्कवाड, स्निफर डाग और पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची। बम डिस्पोजल स्कवाड की जांच में यह बात सामने आई कि यह विस्फोटक गोले नहीं है। इसके बाद महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन के साथ, खगोल विज्ञानियों और वैज्ञानिकों से संपर्क किया गया। इन्हें लोहे के गोलों के फोटो व वीडियो शेयर किए गए।
इन विशेषज्ञों ने बताया कि लोहे के गोले असल में सैटेलाइट का मलबा है।ये सेटेलाइट या मिसाइल की हाइड्राजिन सेल में लगते हैं जिनसे फ्यूल सप्लाय किया जाता है। बेकार हो जाने के बाद ये कई बार सैटेलाइट से अलग होकर गिर जाते हैं। फिलहाल पुलिस ने इन्हें सुरक्षित रख लिया है। इन गोलों की एक्सपर्ट से जांच कराई जाएगी।
भितरवार के जौरा, किठोंदा, मस्तूरा, सिल्हा, बनियानी और साकनी गांव में करीब 1 बजे ये गोले गिरने शुरू हुए थे। सबसे पहले जौरा गांव में गोले गिरे और इसके बाद करीब 15 मिनट तक अन्य गांवों में भी लोहे के गोले गिरे।
पुलिस की जांच के अनुसार लोहे के साथ कांसा आदि धातुओं से ये गोले बने हैं।
जौरा गांव के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि खेत में धातु का एक गोला गिरा। गोला गिरते ही तेज धमाका हुआ और इससे करीब 2 फीट गहरा गड़ढा हो गया। इतना ही नहीं, यह काफी वजनी गोला चकरी की तरह कई मिनटों तक घूमता रहा। इधर सांखनी बसई मार्ग पर गिरे लोहे के गोले को बच्चे खिलौना समझकर उससे खेलने लगे।
इस संबंध में ग्वालियर के एसएसपी राजेश सिंह चंदेल ने बताया कि
भितरवार में गिरे गोलों की जांच कराई गई है। ये विस्फोटक पदार्थ नहीं हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि ये अंतरिक्ष में घूम रहे सैटेलाइट का मलबा हो सकता है।
गोलों का वजन करीब 5 किलो है। करीब 1.5 फीट व्यास के इन गोलों के दोनों ओर कुछ यंत्र भी लगे हुए हैं। पुलिस ने इन्हें सुरक्षित रख लिया है।