
ग्वालियर। उज्जैन के महाकाल मंदिर को इल्तुतमिश ने ध्वस्त कर दिया था और उसके बाद कुंभ का आयोजन उज्जैन में 500 साल तक बंद रहा था। वहीं मंदिर का पुनर्निर्माण ग्वालियर के सिंधिया राजवंश के संस्थापक महाराजा राणोजी सिंधिया ने कराया था और उसके बाद बंद रहे सिंहस्थ समागम को भी दोबारा से शुरू कराया गया था। आपको बता दें कि इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत में गुलाम वंश का एक प्रमुख शासक था। उसने 1211 इसवी से 1236 इसवी तक शासन किया। बताया जाता है कि महाकाल के ज्योतिर्लिंग को करीब 500 सालों तक विक्रमादित्य के बनवाए मंदिर के भग्नावशेषों में ही पूजा जाता रहा था। मराठा साम्राज्य विस्तार के लिए निकले ग्वालियर मालवा के तत्कालीन सूबेदार राणोजी सिंधिया ने जब बंगाल विजय के लिए रास्ते में उज्जैन में पड़ाव किया था उस दौरान उन्होंने उज्जैन में महाकाल मंदिर की दुर्दशा देखी, तो वे दुखी हो गए।
मंदिर ध्वस्त था और भगवान महाकाल पानी के अंदर थे। एक तरह से लगभग 500 साल तक महाकाल पानी में ही थे। उन्होंने वहां अपने सरदारों को आदेश दिया कि बंगाल विजय से लौटने तक महाकाल महाराज के लिए भव्य मंदिर बन जाना चाहिए। इसके बाद से ही सिंधिया परिवार उज्जैन के महाराज महाकाल को ही मानता है और वह कभी भी उज्जैन में रात नहीं रुकते हैं।
अभी हाल ही में शिवपुरी में कोलारस उपचुनाव के चलते बुधवार को सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने फतेहपुर क्षेत्र में बनाए गए प्रभू उपहार भवन के उद्घाटन अवसर पर कहा कि जब हमारे पूर्वज महाराष्ट्र से निकले तो पहली राजधानी सिंधिया राजवंश की उज्जैन में बनी।
सिंधिया राजवंश ने यह नीति बनाई कि उज्जैन के एक ही महाराज हैं और वो हैं महाकाल। मैं 14वीं पीढ़ी हूं और आज भी मैं मालवा के दौरे पर जाते समय रात में उज्जैन नहीं रुकता। सांसद सिंधिया ने कहा कि सिंधिया परिवार का गृहनिवास उज्जैन में कभी नहीं रहा,लेकिन उज्जैन शहर के बॉर्डर के बाहर एक महल है,वहां रुकते हैं। अध्यात्म व धर्म में आज के नौजवानों की जो रुचि होनी चाहिए,वो नहीं है।
इस रुचि को जगाने की जिम्मेदारी भी बुजुर्ग पीढ़ी की होनी चाहिए। सिंधिया ने आध्यात्मिक केंद्र के भवन का उद्घाटन करते हुए ध्वजारोहण किया तथा भगवान शिव की पूजा भी की। इसके साथ ही सिंधिया ने कोलारस के ग्राम सरजापुर, पचावली, सेसई में कांग्रेस प्रत्याशी महेन्द्र यादव के समर्थन में आयोजित सभाओं में कहा कि जैसे किसी घर की दीवार पर मकड़ी जाल बिछा देती है,वैसे ही मैंने कोलारस विधानसभा क्षेत्र में चारों ओर सड़कों का जाल बिछाया है।
मैं कोलारस की मकड़ी हूं और इस जाल में आप लोगों को सीएम शिवराज सिंह चौहान को फंसाना है। कोलारस के ग्राम सरजापुर, पचावली, सेसई में कांग्रेस प्रत्याशी महेन्द्र यादव के समर्थन में आयोजित सभाओं में कही कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह भी कहा कि रामसिंह यादव ने कोलारस के एक-एक मुद्दे को विधानसभा में उठाकर सीएम को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया।
वहीं मुख्यमंत्री उनके दुनिया से जाने के बाद कोलारस के मंच से उनकी आलोचना करें तो यह एक विधायक का अपमान है। सिंधिया ने स्वीकृत कराई गईं सड़कों की जानकारी देते हुए बताया कि लुकवासा से चंदनपुरा,शोनपुरा होते हुए राजस्थान के औगाड़ तक 35 किमी सड़क 32 करोड़ रुपए की लागत से बनवाई, ऐजवारा से बदरवास, रन्नौद से पचावली, देहरदा से ईसागढ़, कोलारस से गुड़ा, सरजापुर से गोहरी, कार्या, भटौआ, कोलारस से चनेनी चारों तरफ सड़कों का एक ऐसा जाल बिछाया जैसे दीवार पर मकड़ी जाल बनाकर बैठ जाती है।
सिंधिया राजवंश करता है देखरेख
राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने अपनी बायोग्राफी 'राजपथ से लोकपथ परÓ में लिखा है कि राणोजी अपना संकल्प पूरा कर जब वापस उज्जैन पहुंचे तो नवनिर्मित मंदिर में उन्होंने महाकाल की पूजा अर्चना की। राणोजी ने ही 500 साल से बंद सिंहस्थ आयोजन को भी दोबारा शुरू कराया। आज भी उज्जैन में कई मंदिरों की देखरेख सिंधिया राजवंश कर रहा है।
Updated on:
16 Feb 2018 01:34 pm
Published on:
16 Feb 2018 01:29 pm
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