simhastha

सिंहस्थ

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विवरण :
इंद्र का पुत्र जयंत अमृत कलश लेकर भाग रहा था, बाकी देवता उसकी रक्षा कर रहे थे। जयंत दानवों से घिर गया। इस छीना-झपटी में चार स्थानों पर अमृत की बूंदें छलकीं। वे स्थान हैं- प्रयाग, नासिक, उज्जैन और हरिद्वार। मान्यता है कि जिन ग्रह स्थितियों में अमृत गिरा था, उनकी पुनरावृत्ति होने पर कुंभ महापर्व मनाया जाता है।

पहला शाही स्नान : 22 अप्रेल 2016

आखरी शाही स्नान : 21 मई 2016

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