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Shardiya Navratri 2025: महिषासुर मर्दिनी से लेकर धन की देवी लक्ष्मी के विराट स्वरूप का करें दर्शन

Navratri 2025: प्राचीन काल में माता दुर्गा के प्रति आस्था और भक्ति का स्वरूप हमें प्राचीन मूर्तियों में देखने को मिलता है। ग्वालियर किला स्थित गूजरी महल में 5 वीं शताब्दी से लेकर 14 वीं शताब्दी तक की प्राचीन मूर्तियां संग्रहित है। इनमें हमें माता शक्ति के विराट स्वरूप के दर्शन होते हैं।

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Sharadiya Navratri 2025

Sharadiya Navratri 2025 (फोटो सोर्स : पत्रिका)

Shardiya Navratri 2025: भक्ति, श्रद्धा और आस्था के नवरात्र सोमवार से आरंभ हो गया हैं। नौ दिनों तक भक्त माता रानी की आराधना में तल्लीन रहेंगे। इसके लिए तैयारियां आरंभ हो गई है। प्राचीन काल में माता दुर्गा के प्रति आस्था और भक्ति का स्वरूप हमें प्राचीन मूर्तियों में देखने को मिलता है। ग्वालियर किला स्थित गूजरी महल में 5 वीं शताब्दी से लेकर 14 वीं शताब्दी तक की प्राचीन मूर्तियां संग्रहित है। इनमें हमें माता शक्ति के विराट स्वरूप के दर्शन होते हैं। यह मूर्तियां विभिन्न मुद्राओं और विभिन्न स्वरूपों में हैं, जो देश के विभिन्न स्थानों से मिली हैं।

महिषासुर मर्दिनी की विशाल मूर्ति

गूजरी महल में 5 वीं शताब्दी की विदिशा जिले के बेसनगर से प्राप्त हुई महिषासुर मर्दिनी की विशाल मूर्ति की भव्यता देखने लायक हैं। मूर्ति में माता भैंसे के ऊपर सीधी मुद्रा में खड़ी हुई हैं, जो महिषासुर के वध को प्रदर्शित करती है। यह मूर्ति प्राचीन समय की स्त्री शक्ति को प्रदर्शित करती है।

धन की देवी लक्ष्मी की अलौकिक आभा

13 वीं शताब्दी की मुरैना जिले के नरेसर से प्राप्त धन की देवी लक्ष्मी की मूर्ति में माता का शांत स्वभाव प्रदर्शित किया गया है। वह आभूषण पहने हुए सिंहासन पर विराजमान हैं, उनका एक पैर ऊपर की ओर आकृत है और वह शिथिल मुद्रा में बैठी हुई हैं। उनके आसपास गणों को भी प्रदर्शित किया गया है।

हाथ में शंख लिए हुए वैष्णवी

13 वीं शताब्दी की मुरैना के नरेसर से प्राप्त वैष्णवी की मूर्ति की आभा अलग ही नजर आती है। हाथ में शंख लिए हुए, शरीर पर आभूषणों की लड़ी देखी जा सकती है। उनके सामने गण हाथ जोड़े हुए आराधना करते दिखाई देता है, जिससे उनकी दैवीय शक्ति का पता चलता है।

माता पार्वती का भव्य स्वरूप

10 से 11 वीं शताब्दी के बीच की माता पार्वती की मूर्ति अपने आप में आकर्षण का केंद्र है। खड़ी मुद्रा में पायल पहने हुए, मुकुट धारण किए हुए, गहनों से सजी हुई मूर्ति का अद्भुत स्वरूप है। मूर्ति का मुख्य आकर्षण उसके पीछे बना हुआ कपाट है, जो मूर्ति मूर्ति को आकर्षक रूप देता है।

सप्त मातृ का के दैवीय रूप

महाशक्ति का प्रतिनिधित्व करती सप्त मातृकाओं की मूर्तियों के स्वरूप को महल में देखा जा सकता है। यह 5 वीं शताब्दी की मूर्तियां विदिशा के बेसनगर से प्राप्त हुई हैं। इनको देखने के लिए लोग दूर दूर से ग्वालियर आते हैं। आने वाले दिनों में भीड़ बढ़ेगी।