
श्योपुर विधानसभा में मीणा और विजयपुर में आदिवासी वोटर करते हैं उलटफेर
अनूप भार्गव @ श्योपुर
भले ही राजनीतिक दल चुनाव के दौरान विकास की बात करते हों और विकास व काम के दम पर जीत के दावे। पर श्योपुर और विजयपुर विधानसभा क्षेत्र का मिजाज कुछ अलग ही है। यहां चुनाव के दौरान वर्चस्व रखने वाली दो जातियां अपने ही सजातीय उम्मीदवार का गुणा, भाग और जोड़ फेल कर देती हैं, जबकि सजातीय उम्मीदवार जीत के लिए जातिगत समीकरण को ध्यान में रखकर मैदान में उतरते हैं।
38 साल से सजातीय उम्मीदवारों का गुणा-भाग दोनों विधानसभा क्षेत्रों में फेल हो रहा है। यही वजह है कि उन्हें हर बार हार का स्वाद चखना पड़ता है। वर्ष 1980 में श्योपुर विधानसभा क्षेत्र से मीणा समाज के बद्रीलाल रावत विधायक चुने गए थे, इसके बाद अब तक यहां इस जाति का कोई भी विधायक नहीं चुना गया। विजयपुर विधानसभा क्षेत्र का हाल तो इससे भी बुरा है यहां करीब 65 हजार आदिवासी वोट बैंक होने के बाद भी आदिवासी नेता विधायक नहीं बन सका।
तीन बार लड़े और हारे
श्योपुर विधानसभा क्षेत्र में वोट बैंक के लिहाज से मीणा जाति का वर्चस्व कायम है। इस विधानसभा क्षेत्र में मीणा जाति के करीब 56 हजार वोटर हैं। इसके बाद भी बीएसपी से तीन बार चुनाव मैदान में उतरे बाबू जंडेल को हार का स्वाद चखना पड़ा। अब बाबू जंडेल कांग्रेस पार्टी में हैं और टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
दो बार मिली हार
विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में वोट बैंक के लिहाज से आदिवासी जाति का वर्चस्व है। इस विधानसभा में आदिवासी वोट करीब 65 हजार है। इसके बाद भी भाजपा से दो बार चुनाव मैदान में उतरे सीताराम आदिवासी को हार का सामना करना पड़ा। कारण कुछ भी रहे हों, लेकिन आदिवासी नेता इस सीट से अब तक विधायक नहीं चुना जा सका है।
| 224511 | कुल मतदाता श्योपुर विधानसभा |
| 117775 | पुरुष मतदाता |
| 106736 | महिला मतदाता |
| 56000 | वोटर मीणा समाज |
220464 | कुल मतदाता विजयपुर विधानसभा |
| 117319 | पुरुष मतदाता |
| 103145 | महिला मतदाता |
| 65000 | वोटर आदिवासी समाज |
Published on:
18 Oct 2018 02:19 pm
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