3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हाईकोर्ट से CBI को झटका, चिरायु मेडिकल कॉलेज के संचालक ट्रस्टी अजय गोयनका दायर आरोप पत्र निरस्त

Shock to CBI from High Court, charge sheet filed by Chirayu Medical College director trustee Ajay Goen canceled

2 min read
Google source verification
हाईकोर्ट से CBI को झटका, चिरायु मेडिकल कॉलेज के संचालक ट्रस्टी अजय गोयनका दायर आरोप पत्र निरस्त

हाईकोर्ट से CBI को झटका, चिरायु मेडिकल कॉलेज के संचालक ट्रस्टी अजय गोयनका दायर आरोप पत्र निरस्त

हाईकोर्ट की युगल पीठ से व्यापमं केस में सीबीआइ को बड़ा झटका लगा है। चिरायु मेडिकल कॉलेज भोपाल के संचालक ट्रस्टी अजय गोयनका के खिलाफ दायर आरोप पत्र(चालान) को निरस्त कर दिया है। डॉ गोयनका को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले के महत्वपूर्ण पहलू को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। एमबीबीएस सीट पर दाखिले 2011 के हैं। केस को 12 साल बीत गए हैं। मेडिकल विद्यार्थियों ने 5 वर्षों तक अपनी पढाई की। इस अवधि के दौरान एएफआरसी (एडमीशन एंड फीस रेगुलेटरी कमेटी) ने उनके व कॉलेज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। निराधार तथ्यों के आधार पर याचिकाकर्ता को मुकदमे का सामना करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। इसलिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत हस्तक्षेप योग्य मामला है।

दरअसल सीबीआइ ने चिरायु मेडिकल कॉलेज में सरकारी सीटों पर फर्जीवाड़ा करने वाले 60 आरोपियों के खिलाफ जनवरी 2021 में चालान पेश किया था। इस मामले में सरकारी कोटे की सीट छोडऩे वाले, सीट खरीदने वाले, चिरायु मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन के अधिकारी, बिचौलियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। साथ ही चिरायु मेडिकल कॉलेज के संचालक ट्रस्टी डॉ अजय गोयनका को भी आरोपी बनाया था। चालान पेश होने के बाद डॉ गोयनका ने हाईकोर्ट में आरोप पत्र को चुनौती दी थी। जस्टिस रोहित आर्या व जस्टिस विनोद कुमार द्विवेदी की बैंच ने 12 फरवरी को बहस के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को इस मामले में न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट से डॉ गोयनका को बड़ी राहत मिल गई। फर्जीवाड़े के आरोप से मुक्त कर दिया।

क्या है मामला

चिरायु मेडीकल कॉलज में शासन कोटे की 63 सीटें थीं। कॉलेज प्रबंधन ने वर्ष 2011 में 47 सीटों को गलत तरीके से खाली रखा गया। चिरायु मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन ने मोटी रकम लेकर सीटों को बेच दिया। इन सीटों पर ऐसे विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया गया था, जिन्होंने काउंसलिंग में भाग ही नहीं लिया था। व्यापमं कांड के खुलासे के वक्त झांरी रोड थाने में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। एसआईटी ने तीन लोगों के खिलाफ चालान पेश किया था। वर्ष 2015 में यह केस सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई को हैंडओवर हो गया था। सीबीआई ने पांच साल इस मामले की जांच की। पांच साल की जांच में 57 नए आरोपित बनाए गए हैं। 60 लोगों के खिलाफ चालान पेश किया था।

Story Loader