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श्रुत पंचमी : जैन समाज ने सवा करोड़ णमोकार मंत्र का जाप करते हुए की विश्व शांति की मंगल कामना

- जैन मंदिरों में साफ-सफाई के साथ जिनवाणी ग्रंथों को चढ़ाया कवर

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श्रुत पंचमी : जैन समाज ने सवा करोड़ णमोकार मंत्र का जाप करते हुए की विश्व शांति की मंगल कामना

श्रुत पंचमी : जैन समाज ने सवा करोड़ णमोकार मंत्र का जाप करते हुए की विश्व शांति की मंगल कामना

ग्वालियर. श्रुत पंचमी के उपलक्ष्य में बुधवार को सकल जैन समाज ने णमोकार महामंत्र के सवा करोड़ महामंत्र का जाप करते हुए विश्व शांति की मंगल कामना की। भारतीय जैन मिलन क्षेत्रीय क्रमांक दो के आव्हान पर जैन मंदिरों में साफ-सफाई व जैन जिनवाणी ग्रंथों को कवर चढ़ाकर सुरक्षित किया गया। देश भर की 1300 शाखाओं, ग्वालियर संभाग की 115 और ग्वालियर की 28 शाखाओं के पदाधिकारियों ने जैन मंदिरों, दुकान एवं घरों में बैठकर सवा करोड़ णमोकार महामंत्र जाप का अनुष्ठान किया। इस अवसर पर सुबह से ही शहर के जैन मंदिरों में जैन धर्म ग्रंथ जिनवाणी का अभिषेक के साथ अष्ट दृव्य से संगीतमय महापूजन किया गया। णमोकार मंत्र जाप के संकल्प के साथ ही ग्वालियर क्षेत्रीय क्रमांक-2 में 11 लाख का लक्ष्य 25 लाख मालाओं से पूरा किया। इस मौके पर पुरुष, महिलाएं और युवा केसरिया और सफेद परिधानों में णमोकार मंत्र का जाप कर रहे थे। गस्त का ताजिया स्थित जैन स्वर्ण मंदिर में जिनवाणी को व्यवस्थित रखने के लिए अलमारी भी भेंट की गई।

इन संस्थाओं ने किया णमोकार मंत्र जाप
णमोकार मंत्र का जाप में जैन मिलन ग्वालियर, दीनदयाल नगर, सीपी कॉलोनी, थाटीपुर, चेतकपुरी, फालका बाजार, गोपाचल, नेमिनाथ, मामा का बाजार, सिंकदर कम्पू, विनय नगर एवं सकल जैन समाज की अन्य समाजसेवी संगठनों ने किया। इसके अलावा भिंड, मुरैना, अंबाह, पोरसा, मेहगांव, गोरमी, डबरा, मगरोनी, नरवर, भितरवार, शिवपुरी, कोलारस, श्योपुर, मोहना, घाटीगांव में भी णमोकार मंत्र का जाप कर आराधना की गई।

इसलिए कहा गया श्रुत पंचमी
जैन धर्म में जैनाचार्य धरसेन के मन में यह विचार आया कि तीर्थंकर भगवान की वाणी को लिपिबद्ध नहीं किया तो जैन धर्म को आने वाली पीढ़ी कैसे जानेगी। जिनवाणी को श्रुत-शास्त्र रूप में लिपिबद्ध करने का दायित्व आचार्य भूतबली एवं पुष्पदंत को सौंपा गया। प्रथम जैन ग्रंथ षटखड़ागम शुभ तिथि ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन लिपिबद्ध होकर पूर्ण हुआ। इस प्रथम जैन ग्रंथ के मंगलाचरण में प्रथम बार महामंत्र णमोकार को भी लिपिबद्ध किया गया। श्रुत अर्थात शास्त्र की प्रथम रचना होने से इस दिन को श्रुत पंचमी कहा जाता है।

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